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Himachal News: PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह और अफसरशाही विवाद पर अब इस रिटायर्ड IPS अधिकारी ने की सख्त टिप्पणी

Published on: 17 January 2026
Himachal News: PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह और अफसरशाही विवाद पर अब इस रिटायर्ड IPS अधिकारी ने की सख्त टिप्पणी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह और अफसरशाही के बीच चल रहा विवाद (Vikramaditya Singh And Bureaucratic Controversy) अब और गहराता नजर आ रहा है। इस मुद्दे पर अब एक रिटायर्ड IPS अधिकारी खुलकर सामने आए हैं। दरअसल इस मामले में पूर्व DIG विनोद धवन ने हिमाचल की IAS और IPS एसोसिएशन के बयानों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें अनुचित, असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।

विनोद धवन ने कहा कि किसी मंत्री के बयान से असहमति हो सकती है, लेकिन संविधान सभी को अपनी बात रखने की आज़ादी देता है। ऐसे में किसी बयान के विरोध में सामूहिक प्रतिक्रिया देना सही तरीका नहीं है। उन्होंने कहा कि IPS एसोसिएशन की ओर से जारी बयान सेवा की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं।

गौरतलब है कि IPS एसोसिएशन ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह के साथ ड्यूटी देने से इनकार कर दिया था, जबकि IAS एसोसिएशन ने भी मंत्री के “शासक नहीं बनने” वाले बयान की आलोचना की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विनोद धवन ने कहा कि IPS जैसी संवैधानिक संस्था द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुने गए मंत्री के बयान पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना गलत संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे बयान अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत देते हैं कि कानून व्यवस्था और सुरक्षा सेवाओं को रोका जा सकता है, जो बेहद चिंताजनक है। उनके अनुसार यह प्रतिक्रिया न केवल संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ है, बल्कि अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों पर भी सवाल खड़े करती है।

रिटायर्ड IPS अधिकारी ने सवाल उठाया कि क्या IPS अधिकारी या उनकी एसोसिएशन को यह अधिकार है कि वे किसी नागरिक या राजनीतिक व्यक्ति के लिए कानून के संरक्षण को लेकर सार्वजनिक रूप से चेतावनी या धमकी जैसा संदेश दें। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस सेवा का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि डर का माहौल बनाना या सेवाओं के बहिष्कार का संकेत देना।

विनोद धवन ने IPS को संविधान की आत्मा और नागरिकों के अधिकारों का रक्षक बताते हुए कहा कि हालिया बयानबाजी ब्रिटिश दौर की पुलिस मानसिकता की याद दिलाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी मंत्री का बयान गलत है, तो उसका जवाब संवैधानिक और कानूनी तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे एक खतरनाक मिसाल बताते हुए कहा कि सुरक्षा देने वाली संस्थाओं का ऐसा रुख संवैधानिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

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