Himachal News: हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार की लापरवाही के कारण केंद्र से मिलने वाली यह महत्वपूर्ण आर्थिक मदद बंद हुई है।
वीरवार को शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता में ठाकुर ने कहा कि सरकार ने 16वें वित्त आयोग के सामने प्रदेश का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा। उन्होंने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग ने पहले ही इस अनुदान के बंद होने के संकेत दे दिए थे, लेकिन सरकार ने कोई तैयारी नहीं की।
ठाकुर ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने ही वित्त आयोग के सामने आरडीजी को विसंगति बताते हुए इसे बंद करने का समर्थन किया था। उन्होंने प्रदेश सरकार से पूछा कि वह कर्नाटक सरकार की इस राय से क्यों अलग रुख अपना रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से उनकी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2027 तक प्रदेश को आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे अमीर राज्य बनाने की क्या रणनीति है। उनका आरोप था कि सरकार ने अपने तीन साल के कार्यकाल में सिर्फ केंद्र सरकार को दोष देने का काम किया है, जबकि जनता को अब काम दिखना चाहता है।
उन्होंने कहा कि चुनावी वादे पूरे करने की जिम्मेदारी कांग्रेस की खुद की है, केंद्र सरकार की नहीं। ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है और उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए।
आर्थिक हालात पर चिंता जताते हुए ठाकुर ने कहा कि सरकार ने कर्ज लेने की सारी सीमाएं पार कर ली हैं, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के अधिकतर काम केंद्र के पैसे से हो रहे हैं, इसलिए सरकार को केंद्र के प्रति अपनी भाषा संयमित रखनी चाहिए।
पंचायत चुनावों को लेकर भी ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार हार के डर से सुप्रीम कोर्ट गई है और पंचायतों में लोकतंत्र नहीं चाहती। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक निधि बंद होने के कारण विधायक प्राथमिकता बैठकों का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है।














