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Himachal Terrorist Attack: क्या आपको भी याद है जब हिमाचल में हिजबुल के आतंकियों ने कर दी थी 35 लोगों की हत्या

Himachal Terrorist Attack Memories: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में वर्ष 1998 में हुआ आतंकी हमला आज भी लोगों को झकझोर देता है। पाक परस्त हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों ने रात के अंधेरे में सतरुंडी और कालाबन गांवों में आतंकियों ने 35 हिंदू मजदूरों की बेरहमी से हत्या कर दी
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Published on: 8 February 2026
Himachal Terrorist Attack: क्या आपको भी याद है जब हिमाचल में हिजबुल के आतंकियों ने कर दी थी 35 लोगों की हत्या

Himachal Terrorist Attack: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में वर्ष 1998 में हुआ आतंकी हमला आज भी लोगों को झकझोर देता है। आज से करीब 27 वर्ष पहले हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुई एक आतंकी घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। पाकिस्तान परस्त हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादियों ने वर्ष 1998 में एक मुस्लिम मजदूर को छोड़ कर 35 हिंदू मजदूरों की निर्मम हत्या कर दी थी।

दरअसल, यह हमला उस समय हुआ, जब कश्मीर आतंकवाद की आग में जल रहा था और उसका असर सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच चुका था। हिमाचल प्रदेश का चंबा जिला जम्मू-कश्मीर की सीमा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में कश्मीर में फैले आतंक का प्रभाव यहां भी साफ दिखाई देने लगा था। 2 अगस्त 1998 को सतरुंडी और कालाबन गांवों में आतंकियों ने सड़क निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को निशाना बनाया गया , ये सभी मजदूर साच पास मार्ग पर काम कर रहे थे।

पाकिस्तान परस्त आतंकी जिला चंबा की सीमा में घुसे और सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देकर फरार हो गए। उस हमले में कुछ लोग लापता भी हो गए थे, उनका कभी पता नहीं चल सका। ये भी पता नहीं चल पाया कि आतंकी कितने थे और कैसे आए थे। हमले के दौरान आतंकियों ने कुल 6 मजदूरों को बंधक बनाया था। इनमें से एक मुस्लिम मजदूर को छोड़ दिया गया, जबकि पांच हिंदू मजदूरों का आज तक कोई पता नहीं चल पाया है।

बताया जाता है कि आतंकियों ने यह हमला सुनियोजित तरीके से किया था, ताकि कश्मीर की तरह हिमाचल प्रदेश में भी डर का माहौल बनाया जा सके। रात के अंधेरे में हुए इस हमले में मजदूर अपने अस्थायी टेंटों में सो रहे थे। आतंकियों ने उन्हें घेरकर अंधाधुंध गोलियां चलाईं और सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देकर फरार हो गए। बाद में इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने ली थी।

उस समय के जानकार बताते हैं कि वर्ष 1998 में हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। उस दौर में न तो मोबाइल फोन आम थे और न ही आज जैसी संचार सुविधाएं मौजूद थीं। जिला चंबा उस समय काफी पिछड़ा हुआ माना जाता था। कई इलाकों में सड़कें तक नहीं थीं, जिससे संपर्क और राहत कार्य बेहद मुश्किल हो जाता था।

कालाबन गांव में आतंकी हमला गहरी रात में हुआ। आतंकियों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और 26 मजदूरों की मौके पर ही हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने मृतकों का सामान भी लूट लिया। इसी क्रम में सतरुंडी इलाके में भी गोलीबारी की गई, जहां नौ और लोगों की जान चली गई। इस तरह कुल 35 निर्दोष लोगों की हत्या कर आतंकी फरार हो गए। इस हत्याकांड में आठ लोग घायल भी हुए थे।
Himachal Terrorist Attack: क्या आपको भी याद है जब हिमाचल में हिजबुल के आतंकियों ने कर दी थी 35 लोगों की हत्या

सतरुंडी में मारे गए लोगों में एक पुलिस कर्मी, ग्राम सेवक और एसडीएम कार्यालय का एक कर्मचारी भी शामिल था। आतंकियों ने लूटे गए सामान को उठाने के लिए करीब छह लोगों को बंधक बना लिया और अपने साथ ले गए। बाद में इनमें से एक व्यक्ति को छोड़ दिया गया, जो मुस्लिम समुदाय से बताया जाता है। दुख की बात यह है कि बाकी पांच बंधकों का आज तक कोई सुराग नहीं लग पाया। वे जीवित हैं या नहीं, इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

इस दिल दहला देने वाली घटना का खुलासा एक महिला की गवाही से हुआ था। हमले के समय वह महिला लाशों के नीचे दबकर किसी तरह जीवित बच गई थी। वह पांगी घाटी के एक गांव की रहने वाली थी। आतंकियों के चले जाने के बाद वह किसी तरह गांव पहुंची और फिर इस नरसंहार की सूचना पांगी घाटी के मुख्यालय किलाड़ तक पहुंची।

पुलिस जांच में सामने आया कि आतंकी जम्मू के घने जंगलों के रास्ते हिमाचल में दाखिल हुए थे। कालाबन और सतरुंडी में वारदात को अंजाम देने के बाद वे बिंद्रावणी क्षेत्र से होते हुए चूटो गांव पार कर डोडा की ओर निकल गए। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। शिमला से तत्कालीन डीजीपी टी.आर. महाजन सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।

उस समय पांगी घाटी के मुख्यालय किलाड़ में प्रभात शर्मा एसडीएम के पद पर तैनात थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी मिंजर मेले के सिलसिले में चंबा आए हुए थे और बाद में उन्होंने घटनास्थल का दौरा किया। हालांकि, यह मामला कभी सुलझ नहीं पाया। बाद में यह भी पता चला कि आतंकी जम्मू के डोडा जिले के गंदोह क्षेत्र से चंबा में दाखिल हुए थे। बंधक बनाए गए लोगों का आज तक कोई पता नहीं चला है और इस भयावह घटना की दहशत आज भी इलाके में महसूस की जाती है।

इस जघन्य घटना की याद को जीवित रखने के लिए 14 सितंबर 2014 को घटनास्थल पर एक शहीद स्मारक बनाया गया। स्मारक पर हमले से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज है, जिसमें बताया गया है कि सतरुंडी में 9 और कालाबन में 26 मजदूरों की हत्या की गई थी। आज भी यह घटना हिमाचल प्रदेश के इतिहास का एक दर्दनाक और काला अध्याय मानी जाती है।

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