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NCERT Textbook Controversy: कक्षा 8 की किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर बवाल! सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद NCERT ने मांगी माफी

NCERT Class 8 Textbook Row: कक्षा 8 की एनसीईआरटी किताब में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' के जिक्र पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए इसे संस्थान को बदनाम करने की कोशिश बताया। इसके बाद NCERT ने माफी मांगते हुए किताब का वितरण रोक दिया है।
NCERT Textbook Controversy: कक्षा 8 की किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर बवाल! सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद NCERT ने मांगी माफी

NCERT Textbook Controversy: आमतौर पर स्कूल की किताबें सिर्फ पढ़ाई के लिए होती हैं, लेकिन इस बार कक्षा 8 की एक सामाजिक विज्ञान की किताब विवादों में घिर गई। किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ का जिक्र करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट की फटकार के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को माफी मांगनी पड़ी। अब इस किताब को दोबारा लिखा जाएगा।

दरअसल, यह पूरा मामला तब सामने आया जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे।

प्रधान न्यायाधीश ने साफ कहा कि न्यायपालिका की छवि खराब करने या उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसे बहुत गंभीर बताया और कहा कि ऐसा लगता है जैसे यह सोच-समझकर किया गया कदम हो। न्यायमूर्ति बागची ने भी चिंता जताई कि ऐसी बातें संविधान की जड़ों पर हमला करती दिखती हैं।

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कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद एनसीईआरटी ने तुरंत बयान जारी किया। परिषद ने माना कि किताब के उस अध्याय में कुछ गलत और अनुचित बातें अनजाने में शामिल हो गई थीं। एनसीईआरटी ने कहा कि वह भारतीय न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है। यह न्यायपालिका को संविधान का रक्षक और लोगों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने वाली संस्था मानती है।

एनसीईआरटी ने यह भी दोहराया कि उसकी नई किताबों का मकसद बच्चों में संविधान की समझ बढ़ाना, संस्थाओं के प्रति सम्मान पैदा करना और लोकतंत्र में भागीदारी की भावना जगाना है। किसी भी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाना इसका उद्देश्य कभी नहीं रहा।

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विवाद बढ़ने पर एनसीईआरटी ने उस सामाजिक विज्ञान की किताब को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। किताब का बंटवारा भी रोक दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब इस हिस्से की समीक्षा होगी। उसके बाद सही सलाह लेकर नया संस्करण तैयार किया जाएगा।

विवाद की वजह यह थी कि किताब में न्यायपालिका की भूमिका बताते हुए विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया था। साथ ही लंबित मामलों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं का भी उल्लेख था। कोर्ट ने इन बातों को आपत्तिजनक माना और कहा कि इससे न्यायपालिका की गरिमा और निष्पक्षता को नुकसान पहुंच सकता है।

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सुनवाई में अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर भ्रष्टाचार की बात हो रही है तो सिर्फ न्यायपालिका का ही जिक्र क्यों? अन्य सरकारी संस्थाओं पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने इसे एकतरफा और असंतुलित बताया। यह दलील विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।

एनसीईआरटी ने बताया कि संशोधित अध्याय को फिर से लिखा जाएगा। नया संस्करण शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में कक्षा 8 के छात्रों को मिलेगा। परिषद ने कहा कि वह अच्छे सुझावों का स्वागत करती है और किताबों को बेहतर बनाने के लिए लगातार जांच-पड़ताल करती रहती है।

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