Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सीबीएसई सिलेबस लागू होने और शिक्षकों के लिए अनिवार्य परीक्षा को लेकर छिड़ा विवाद अब हाईकोर्ट में है। ‘हिमाचल प्रदेश ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट’ ने सरकार के उस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें पुराने और अनुभवी शिक्षकों को भी दोबारा परीक्षा पास करने को कहा गया है।
फिलहाल, कोर्ट ने शिक्षकों को किसी भी तरह की राहत (स्टे) देने से इनकार कर दिया है और मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की बेंच इस मामले को देख रही है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि सरकार के इस परीक्षा वाले आदेश को तुरंत रद्द किया जाए।
दूसरी तरफ, शिक्षा विभाग ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अभी तक कोर्ट ने सरकार और सीबीएसई को नोटिस तो जारी किए हैं, लेकिन शिक्षकों की परीक्षा पर कोई रोक नहीं लगाई है। फिलहाल शिक्षक असमंजस में हैं कि आगे क्या होगा, और सबकी नजरें शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
दरअसल यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब हिमाचल सरकार ने करीब 150 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड से जोड़ने का फैसला लिया। सरकार का कहना है कि इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षकों को एक विशेष परीक्षा पास करनी होगी।
लेकिन शिक्षक संगठन इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि जो अध्यापक पिछले कई सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनसे अब दोबारा परीक्षा लेना पूरी तरह गलत है। शिक्षकों को डर है कि इससे न केवल उनकी नौकरी की शर्तों पर बुरा असर पड़ेगा, बल्कि उनके करियर में अस्थिरता भी आएगी।


















