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Himachal Kick Boxing Player Dikshita: हिमाचल की बेटी दीक्षिता की गोल्डन उड़ान, मेहनत और हौसले से फिर रचा इतिहास

Published on: 20 July 2025
Himachal kick boxing player Dikshita: हिमाचल की बेटी दीक्षिता की गोल्डन उड़ान, मेहनत और हौसले से फिर रचा इतिहास

Himachal Kick Boxing Player Dikshita: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के रोहडू क्षेत्र के छोटे से गांव टिक्कर दिस्वानी की दीक्षिता ने छत्तीसगढ़ में आयोजित सीनियर नेशनल किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे प्रदेश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।

बता दें कि 16 से 20 जुलाई 2025 को हुई इस प्रतियोगिता में दीक्षिता ने अपने दमदार प्रदर्शन से न सिर्फ स्वर्ण पदक हासिल किया, बल्कि अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन किया। हिमाचल प्रदेश से 14 खिलाडियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया था।

दीक्षिता की इस गोल्डन जीत को लेकर सब उत्साहित होंगे, लेकिन इस चमकते मेडल के पीछे की कहानी इतनी आसान नहीं है। ये कहानी है मेहनत, हौसले, और सपनों की, जो मुश्किल हालातों को मात देकर सच हुए हैं।

Himachal Kick Boxing Player Dikshita: 14 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर

दीक्षिता की कहानी तब शुरू हुई, जब वह सिर्फ 14 साल की थी। 2014 में, 9वीं क्लास में पढ़ने वाली इस नन्हीं सी लड़की ने बॉक्सिंग से अपने खेल के सफर की शुरुआत की। लेकिन बाद में उन्होंने किक बॉक्सिंग को चुना और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्तमान में दीक्षिता सीमा कॉलेज (रोहडू ) में बीए की पढ़ाई के साथ-साथ ने अपने खेल को भी पूरी शिद्दत से निभाया।

दीक्षिता के जीवन में सबसे सुनहरा पल तब आया जब 2019 में पहला नेशनल गोल्ड मेडल जीता, फिर 2020 में सिल्वर, 2021 और 2022 में ब्रॉन्ज, 2023 में सिल्वर और खेलो इंडिया में गोल्ड, और 2024 में फिर ब्रॉन्ज।

इस साल फरवरी में तो दीक्षा ने इतिहास रच दिया, जब वह गाला फाइट में भारत की पहली महिला विजेता बनीं और इंटरनेशनल गोल्ड मेडल अपने नाम किया। अप्रैल 2025 में वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीता, और अब जुलाई 2025 में छत्तीसगढ़ में नेशनल गोल्ड ने उनके जज्बे को एक बार फिर साबित कर दिया।

मुश्किलों से भरा रहा है दीक्षा का रास्ता

दीक्षिता की जिंदगी में चुनौतियां कम नहीं थी। वह चार बहनों में से सबसे छोटी, तीन की शादी हो चुकी है, और वह अपनी मां के साथ रहती हैं। साल 2021 में उनके सर से पिता का साया उठ गया, जिसने परिवार को एक गहरा सदमा दिया।

लेकिन दीक्षिता ने हिम्मत नहीं हारी। मां के सहारे और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अपने सपनों को नई उड़ान दी। गांव की साधारण सी लड़की, जिसके पास बड़े-बड़े संसाधन नहीं थे, उसने अपने हौसले से दुनिया को दिखा दिया कि अगर ठान लो, तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

छोटे से गांव से अबू धाबी तक का सपना

दीक्षिता की नजर अब नवंबर 2025 में अबू धाबी में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप पर है। वह कहती हैं, “ये मेडल मेरे लिए सिर्फ एक पदक नहीं, मेरे माता- पिता और परिवार के सपनों का हिस्सा है। मैं चाहती हूं कि मेरी मां को मुझ पर गर्व हो और मेरा गांव दुनिया के नक्शे पर आए।”

उन्होंने अपनी जीत का श्रेय अपने वर्तमान कोच अजय सिंह राणा और उन्हें इस फील्ड में आने वाले कोच वीरेंद्र जगिट्टा को दिया है। उन्होंने बताया कि वह वर्तमान में चंडीगढ़ सेक्टर 27 की केजवर्ल्ड फिटनेस एकेडमी, सेक्टर 27सी, चंडीगढ़ से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है।

दीक्षिता की मेहनत और जुनून को देखकर उनके कोच और गांव वाले भी गदगद हैं। दीक्षा की जीत सिर्फ एक मेडल की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसी बेटी की कहानी है, जिसने अपने परिवार की मुश्किलों, समाज की बंदिशों, और संसाधनों की कमी को अपने रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में जीता गया ये गोल्ड मेडल दीक्षिता के लिए एक और कदम है अपने बड़े सपने की ओर। अबू धाबी में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप में वह भारत का परचम लहराने को तैयार है। उन्होंने एक बार नहीं बल्कि कई बार इस बात को साबित कर दिया है कि मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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