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Success Story: 52 साल की उम्र में महज 1,000 रुपये से शुरू किया बिजनेस, आज ‘नमक वाली’ ब्रांड का टर्नओवर 5 करोड़ रुपए

Namak Wali Success Story: उत्तराखंड की शशि बहुगुणा रतूड़ी ने महज 1,000 रुपये से की थी स्टार्टअप की शुरुआत, आज 500 से अधिक किसान और 35 महिलाएं उनके साथ जुड़कर स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रहे हैं।
Success Story: 52 साल की उम्र में महज 1,000 रुपये से शुरू किया बिजनेस, आज 'नमक वाली' ब्रांड का टर्नओवर 5 करोड़ रुपए

Shashi Bahuguna Raturi Success Story: देवभूमि उत्तराखंड की शशि बहुगुणा रतूड़ी ने साबित कर दिया है कि उद्यमिता के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। 52 वर्ष की आयु में जब अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति की योजना बनाते हैं, तब शशि ने ‘नमक वाली’ ब्रांड के माध्यम से एक सफल स्टार्टअप की नींव रखी।

साल 2018 में मात्र 1,000 रुपये की पूंजी और सिलबट्टे पर पिसे पारंपरिक नमक के साथ शुरू हुआ यह सफर आज 5 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुका है। बता दें कि पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की रहने वाली शशि बहुगुणा रतूड़ी ने एक साधारण घरेलू उत्पाद को व्यवसाय में बदलकर उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

शशि बताती हैं कि उनके इस बिजनेस का विचार संगीत की कक्षा के दौरान आया, जहाँ महिलाएं घरों से सिलबट्टे पर पिसा पारंपरिक नमक (पिशु लूण) लेकर आती थीं। उस स्वाद और मेहनत को देखते हुए उन्होंने इसे एक ब्रांड का रूप देने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्हें समाज और यहां तक कि कुछ महिलाओं के परिवारों से भी ताने सुनने पड़े। लोगों का कहना था कि नमक बेचकर घर कैसे चलेगा, लेकिन शशि ने अपने आत्मविश्वास को डगमगाने नहीं दिया।

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चुनौतियों को पीछे छोड़ बनीं बिजनेस वुमेन
शुरुआती दौर में काम को घर से ही सोशल मीडिया के जरिए प्रमोट किया गया। पहले एक महिला के साथ शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे बढ़ता गया। शशि स्वयं पहाड़ों में 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलकर किसानों से सीधे लहसुन, अदरक और धनिया जैसे कच्चे माल इकट्ठा करती हैं। उनका मुख्य उद्देश्य बिना रसायनिक खाद वाली शुद्ध सामग्री का उपयोग करना है। आज उनके ब्रांड में बद्री गाय का घी और विभिन्न प्रकार के हर्बल नमक शामिल हैं।

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बिजनेस में सबसे बड़ा मोड़ 2023 में आया, जब शशि ने ‘शार्क टैंक इंडिया’ (Shark Tank India) के मंच पर अपने स्टार्टअप को प्रस्तुत किया। वहां अमित जैन के साथ 50 लाख रुपये की डील ने ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। शो के बाद मांग इतनी बढ़ गई कि पूरी टीम को रात-रात भर काम करना पड़ा। उस समय वेबसाइट क्रैश होने और ऑर्डर्स का प्रबंधन करना बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने धैर्यपूर्वक हल किया।

पर्यावरण और समाज के प्रति समर्पण
‘नमक वाली’ केवल एक व्यापारिक इकाई नहीं है, बल्कि यह 35 महिलाओं को सीधा रोजगार और 500 से अधिक किसानों को बाजार उपलब्ध कराने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। शशि के अनुसार, हर एक ग्राहक के साथ होने वाले व्यापार का एक हिस्सा पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित है, जिसके तहत ग्राहकों की ओर से वृक्षारोपण किया जाता है।

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शशि आज के उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपनों को उम्र की वजह से दबा देते हैं। उन्होंने सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प, इच्छाशक्ति और पूरी ईमानदारी से किया गया प्रयास किसी भी स्टार्टअप को शून्य से शिखर तक ले जा सकता है। वर्तमान में उनके उत्पाद न केवल उनकी वेबसाइट, बल्कि ब्लिंकिट (Blinkit), अमेज़न (Amazon) और बड़े होटल्स में भी उपलब्ध हैं।

शशि बहुगुणा रतूड़ी के अनुसार, इस पहल की शुरुआत का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार देना और पारंपरिक, शुद्ध उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि इस दिशा में निरंतर प्रयास और धैर्य के साथ काम करने से ही यह संभव हो पाया।

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