NEET Paper Leak Case: NEET पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच अब बेहद आक्रामक और तेज हो गई है। जांच एजेंसी ने महाराष्ट्र के सबसे प्रमुख और रसूखदार कोचिंग संचालकों में से एक शिवराज मोटेगांवकर को 11 घंटे की लंबी और मैराथन पूछताछ के बाद पुणे से हिरासत में ले लिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की 28 सदस्यीय विशेष टीम ने इस मामले को लेकर उनसे बेहद गहन पूछताछ की है। जांच के इस मोड़ के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि हिरासत में लिए गए आरोपी को जल्द ही दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जा सकता है, जहां इस पूरे मामले से जुड़े कई बेहद अहम और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना है।
बता दें कि इस बड़ी कार्रवाई के बाद देश के शिक्षा जगत और कोचिंग हब में हड़कंप मच गया है। कोचिंग जगत में ‘M Sir’ के नाम से मशहूर शिवराज मोटेगांवकर मूल रूप से महाराष्ट्र के लातूर जिले के रहने वाले हैं। वह आरसीसी (रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस) के संस्थापक और मुख्य संचालक हैं। इस संस्थान को पूरे महाराष्ट्र राज्य में NEET और JEE परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए एक प्रमुख कोचिंग ब्रांड के रूप में गिना जाता है। लातूर के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे मोटेगांवकर ने अपने करियर की शुरुआत बेहद जमीनी स्तर पर साइकिल पर जाकर ट्यूशन पढ़ाते हुए की थी।
वर्ष 1999 में शिवराज मोटेगांवकर ने सिर्फ 10 छात्रों के साथ किराए के एक छोटे से कमरे से अपनी कोचिंग की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में वह खुद छात्रों को केमिस्ट्री पढ़ाते थे और अपने हाथों से नोट्स तैयार कर छोटे-छोटे बैच चलाया करते थे। पिछले दो दशकों में आरसीसी ने लातूर पैटर्न की देशव्यापी लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाया और अपनी शाखाओं का तेजी से विस्तार किया।
आज की तारीख में इस संस्थान के केंद्र महाराष्ट्र के लातूर, पुणे, नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, सोलापुर और कोल्हापुर जैसे कई बड़े शहरों में चल रहे हैं, जहां हर साल करीब 40,000 छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए दाखिला लेते हैं। इस पूरे कोचिंग नेटवर्क का अनुमानित वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता है।
गौरतलब है कि शिवराज मोटेगांवकर शैक्षणिक रूप से भी काफी मजबूत पृष्ठभूमि रखते हैं और वह एम.एससी केमिस्ट्री में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। उनके संस्थान से जुड़े छात्र ‘M Sir’ को कॉन्सेप्ट आधारित पढ़ाई कराने और विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को बेहद आसान तरीके से केमिस्ट्री समझाने के मामले में एक्सपर्ट मानते हैं। लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही उनके संस्थान ने बाद में डिजिटल कोर्स, मोबाइल ऐप, टेस्ट सीरीज और राज्यव्यापी मेंटरशिप कार्यक्रम की भी शुरुआत की थी।
अब इस मामले में सीबीआई मोटेगांवकर के संबंध सेवानिवृत्त केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी के साथ तलाश रही है। पीवी कुलकर्णी को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उन पर मुख्य रूप से केमिस्ट्री का पेपर लीक करने का गंभीर आरोप है। सूत्रों का कहना है कि प्रोफेसर कुलकर्णी ने कुछ समय पहले मोटेगांवकर के संस्थान आरसीसी (RCC) में अध्यापन का कार्य भी किया था, जिसके चलते अब इन दोनों के बीच के संबंधों और वित्तीय लेन-देन की गहराई से छानबीन की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि NEET पेपर लीक मामले ने पहले ही पूरे देश के छात्रों और अभिभावकों के बीच हड़कंप मचा रखा है। ऐसे में सीबीआई द्वारा की गई इस कार्रवाई और पूछताछ को एजेंसी की अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। जांच अधिकारी अब पूरी मुस्तैदी से इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि पेपर लीक की इस पूरी राष्ट्रीय स्तर की साजिश में ‘M Sir’ की वास्तविक भूमिका क्या थी और इसके पीछे कितने बड़े रैकेट या नेटवर्क का हाथ काम कर रहा है।

















