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Himachal Panchayat Election: “BDC-जिला परिषद की कोई वैल्यू नहीं” वाले बयान पर घिरे सीएम सुक्खू, भाजपा ने खोला मोर्चा

Himachal News Today: हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के एक बयान पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है, जिसके बाद विपक्ष दल भाजपा के नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है।
Published on: 5 June 2026
Himachal Panchayat Election: "BDC-जिला परिषद की कोई वैल्यू नहीं" वाले बयान पर घिरे सीएम सुक्खू, भाजपा ने खोला मोर्चा

Himachal Panchayat Election Results: हिमाचल प्रदेश में शहरी निकाय और त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। शिमला में आयोजित पर्यावरण दिवस की मिनी मैराथन में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत की। इस दौरान जब मीडिया ने उनसे पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के दावों को लेकर सवाल पूछा, तो मुख्यमंत्री ने दावा किया कि शहरी निकाय व पंचायत चुनाव में कांग्रेस धरातल पर जीती है, जबकि भाजपा सिर्फ सोशल मीडिया में जीती है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल का काम केवल डींगे मारना है, जिससे जमीनी स्तर पर काम नहीं चलता। उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की संपदा को बेचा है। सीएम ने अपने नेतृत्व की सफलता को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस अब तक तीन महत्वपूर्ण चुनाव जीत चुकी है। इसमें पहला शिमला नगर निगम चुनाव, दूसरा विधानसभा उपचुनाव और तीसरा हाल ही में संपन्न हुए शहरी निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने भाजपा की आंतरिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा इस समय पांच गुटों में बंटी हुई है और आने वाले समय में उन्हें अपनी वास्तविक स्थिति का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि गुटबाजी की शिकार भाजपा शिमला के दीपकमल कार्यालय से सिर्फ सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ का माहौल तैयार करती है और अपनी कथित जीत का ढिंढोरा पीटती है।

बयानबाजी के दौरान मुख्यमंत्री ने पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के महत्व को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में प्रधान और उपप्रधान की अधिक वैल्यू (महत्व) होती है। इसके विपरीत, बीडीसी (ब्लाक डेवलपमेंट काउंसिल) और जिला परिषद की वैल्यू केवल एक दिन की होती है। उनके इस बयान को लेकर अब हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

चुनावों के जमीनी आंकड़ों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि पंचायत चुनाव में कांग्रेस समर्थित 2400 प्रधान और 2300 उपप्रधानों ने जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने जिला परिषद चुनाव में 251 सीटों पर अपने अधिकृत प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन वे 100 सीटें भी नहीं जीत पाए।

इसके अतिरिक्त, प्रदेश की 68 पंचायत समितियों में से 60 फीसदी से अधिक सीटों पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य के 53 में से 49 शहरी निकायों में कांग्रेस आगे रही है और पालमपुर नगर निगम में पार्टी को बंपर जीत मिली है, जबकि भाजपा केवल तीन नगर निगमों—धर्मशाला, मंडी और सोलन में ही जीत हासिल कर सकी है।

मुख्यमंत्री ने आगे दावा किया कि कांगड़ा, नूरपुर और ज्वालामुखी में भी कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है। चम्बा और चुवाड़ी जैसी जगहों पर, जहां भाजपा अपनी जीत का दावा कर रही थी, वहां भी कांग्रेस के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बने हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार पहले से ही मई महीने में चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन भाजपा बिना किसी वजह के इस मामले को तूल दे रही थी।

भाजपा बोली- ‘BDC और जिला परिषद का अपमान बर्दाश्त नहीं’
मुख्यमंत्री सुक्खू के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह हमलावर हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जनमत का अपमान करना ही कांग्रेस का असली चरित्र है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों के बारे में सूबे के मुखिया की ऐसी सोच बेहद घृणित और शर्मनाक है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि चुनावों में मिलने वाली करारी हार की बौखलाहट अब मुख्यमंत्री के चेहरे और बयानों पर साफ देखी जा सकती है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री को अपने इस गैर-जिम्मेदाराना बयान के लिए तुरंत प्रदेश की जनता और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से माफी मांगनी चाहिए।

वहीं, भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हर्ष महाजन ने कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करना चाहिए और जनता के निर्णय को स्वीकार करना चाहिए। हार की हताशा में लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुने हुए प्रतिनिधियों और धार्मिक आस्थाओं पर टिप्पणी करना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि यह बयान न केवल चुने हुए जनप्रतिनिधियों का, बल्कि उन लाखों मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर अपने प्रतिनिधियों का चयन किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

इस विवाद में भाजपा विधायक सुधीर शर्मा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से माफी की मांग की है। सुधीर शर्मा ने लिखा कि मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी चुने हुए प्रतिनिधियों और मतदाताओं का खुला अपमान है, और इस गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी ही चाहिए।

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