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शराबखोरी में हिमाचल ने उत्तर भारत को पछाड़ा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने

Himachal Pradesh Alcohol Consumption Rate: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके तहत शराब और तंबाकू सेवन के मामले में हिमाचल प्रदेश पूरे उत्तर भारत में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
NFHS 6 Report Himachal: शराबखोरी में हिमाचल ने उत्तर भारत को पछाड़ा, चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने

NFHS 6 Report Himachal: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में जारी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे  2023-24 की नवीनतम रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश की सामाजिक और स्वास्थ्य स्थिति को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में शराब की लत अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक आयु के 30.2 प्रतिशत पुरुषों ने शराब का सेवन करने की बात स्वीकार की है।

हालांकि, यह आंकड़ा वर्ष 2019-21 के पिछले सर्वे में दर्ज 31.9 प्रतिशत की तुलना में मामूली रूप से कम हुआ है, लेकिन इसके बावजूद हिमाचल उत्तर भारत में शराब सेवन के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में शराब पीने वाले पुरुषों का सबसे अधिक प्रतिशत अरुणाचल प्रदेश में दर्ज किया गया है, जहां 50.5 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं। इसके बाद तेलंगाना में 43.9 प्रतिशत और सिक्किम में 42.2 प्रतिशत पुरुष शराब पीते हैं।

हिमाचल प्रदेश का आंकड़ा भले ही इन राज्यों से कम हो, लेकिन यह उत्तर भारत के अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में काफी ज्यादा है। पड़ोसी राज्यों की तुलना करें तो उत्तराखंड में 27.2 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं। इसके बाद पंजाब में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में 21.6 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 18.7 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं हरियाणा में 17.5 प्रतिशत, देश की राजधानी दिल्ली में 16.1 प्रतिशत, लद्दाख में 18.4 प्रतिशत, राजस्थान में 10.7 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर में सबसे कम केवल 7.3 प्रतिशत पुरुषों ने शराब सेवन की बात कही है।

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इस सर्वे को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश के 10,437 परिवारों को शामिल किया गया था, जिसमें 10,271 महिलाओं और 1,469 पुरुषों से उनके स्वास्थ्य एवं जीवनशैली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी जुटाई गई। प्राप्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश में शराब सेवन का दायरा राष्ट्रीय औसत की तुलना में अधिक बना हुआ है।

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रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि शराब का अत्यधिक सेवन यकृत (लिवर), हृदय और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। इसके अलावा घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य सामाजिक समस्याओं से भी इसका सीधा संबंध देखा गया है। इसी वजह से स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ती इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और नशा मुक्ति कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत पर बल दिया है।

शराब के साथ-साथ तंबाकू सेवन के मामले में भी हिमाचल प्रदेश के आंकड़े चिंताजनक हैं। सर्वे के अनुसार, प्रदेश के 28.9 प्रतिशत पुरुष तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू का सेवन करने वालों का प्रतिशत 29.5 है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 24.6 प्रतिशत लोगों ने तंबाकू को किसी न किसी रूप में प्रयोग करने की बात स्वीकारी है।

स्वास्थ्य के अन्य मोर्चों पर, रिपोर्ट दर्शाती है कि हिमाचल प्रदेश में 38.2 प्रतिशत महिलाएं और 31.4 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आ चुके हैं। वर्ष 2019 की तुलना में मोटापे से ग्रस्त महिलाओं का आंकड़ा 30.4 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 38.2 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी का परिणाम मान रहे हैं। इसके साथ ही, प्रदेश की 20.6 प्रतिशत महिलाओं और 20 प्रतिशत पुरुषों में रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) का स्तर अधिक पाया गया है या वे मधुमेह को नियंत्रित करने की दवा ले रहे हैं। उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की बात करें तो इससे प्रभावित महिलाओं का प्रतिशत 24.1 और पुरुषों का 31.7 दर्ज किया गया है।

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राहत की बात यह है कि बच्चों में कुपोषण के स्तर में सुधार हुआ है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) का स्तर 30.8 प्रतिशत से घटकर अब 20.6 प्रतिशत पर आ गया है। इसके साथ ही, कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत भी 25.5 से कम होकर 16.8 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

महिलाओं के स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रसव पूर्व जांच (एंटीनेटल केयर) को लेकर सकारात्मक आंकड़े मिले हैं। प्रदेश में 94.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने प्रसव पूर्व जांच करवाई, जबकि 83.2 प्रतिशत महिलाओं ने कम से कम चार बार यह जांच सुनिश्चित की। इसके अलावा, संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 91.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है और 92.4 प्रतिशत प्रसव कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में संपन्न हुए हैं।

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