Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

Himachal News: पूर्व रेरा अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी का बड़ा खुलासा, संजय गुप्ता की FIR के पीछे छिपा है ये सच

Shrikant Baldi vs Sanjay Gupta: हिमाचल प्रदेश में दो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विवाद गहरा गया है, जहां रेरा के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी ने पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है।
Himachal News: Shrikant Baldi vs Sanjay Gupta,

Himachal News Today: हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में दो पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के बीच छिड़ी जंग अब खुलकर सामने आ गई है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी ने पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बाल्दी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने अपनी सेवानिवृत्ति के ठीक दिन, यानी 30 मई को अपने पद का सरासर दुरुपयोग किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि गुप्ता ने उनके खिलाफ एक झूठी और पूरी तरह से निराधार एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई है। श्रीकांत बाल्दी ने अपने इस ताजा बयान में साफ किया कि वह अपने पुराने रुख पर पूरी तरह कायम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 12 अप्रैल 2026 को उनके द्वारा जारी किया गया पिछला वक्तव्य पूरी तरह से तथ्यों और पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित था।

बाल्दी ने इस बात पर जोर दिया कि उनके पास अपने द्वारा लगाए गए सभी आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और वैध दस्तावेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर वह आने वाले समय में कानूनी रूप से अपना पक्ष बेहद मजबूती के साथ अदालत के समक्ष रखेंगे। बता दें कि पूर्व रेरा अध्यक्ष ने चेस्टर हिल परियोजना से जुड़े संवेदनशील मामलों को एक बार फिर से दोहराया है।

इसे भी पढ़ें:  Himachal: ऊना-कांगड़ा नई रेल लाइन की मांग, अनुराग ठाकुर और राजीव भारद्वाज ने रेल मंत्री से की मुलाकात

उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि संजय गुप्ता द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे आदेश पारित किए गए थे, जो पूरी तरह से उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे। बाल्दी के अनुसार, इन आदेशों की वैधानिकता पर बाद में राज्य सरकार और विभिन्न न्यायालयों के समक्ष भी गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि चेस्टर हिल परियोजना में पारित इन्हीं विवादित सरकारी आदेशों से सबका ध्यान भटकाने के उद्देश्य से ही उनके खिलाफ यह जवाबी एफआईआर दर्ज कराई गई है।

इसे भी पढ़ें:  पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे की तारीफ कर, फिर चर्चा में आए कांग्रेस के मंत्री विक्रमादित्य

मामले की तह में जाते हुए बाल्दी ने संजय गुप्ता के कार्यकाल से जुड़े कुछ पुराने प्रशासनिक फैसलों का भी ब्यौरा सामने रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चेस्टर हिल मामले में संबंधित एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठे थे, तब तत्कालीन उपायुक्त सोलन को नियमानुसार कार्रवाई करने से रोकने का प्रयास किया गया था। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में नियमों की अनदेखी कर स्वयं ही अपील सुनी गई और पहले से जारी आदेशों को रद कर दिया गया।

दस्तावेजों का हवाला देते हुए बाल्दी ने विस्तार से बताया कि नगर निगम सोलन के आयुक्त ने 11 सितंबर 2025 को चेस्टर हिल परियोजना में हुए कथित अवैध निर्माणों को लेकर उन्हें ध्वस्त करने का एक सख्त आदेश जारी किया था। स्थापित कानूनी नियमों के अनुसार, इस ध्वस्त करने के आदेश के विरुद्ध अपील दायर करने का अधिकार केवल जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पास सुरक्षित था। इसके बावजूद, तत्कालीन मुख्य सचिव (टीसीपी) के रूप में कार्यरत संजय गुप्ता ने नियमों के विपरीत जाकर स्वयं इस अपील पर सुनवाई की और पहली नवंबर 2025 को नगर निगम आयुक्त के उस आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया।

इसे भी पढ़ें:  हिमाचल में खिलाड़ियों पर होगी ‘पैसों की बारिश’, नई खेल नीति पर सरकार की मुहर

श्रीकांत बाल्दी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक और बड़ा आरोप लगाया है। उनके मुताबिक, इस मामले में नियमों को उस वक्त और ज्यादा ताक पर रख दिया गया जब पहली नवंबर को आदेश पारित होने के ठीक दो दिन बाद प्राप्त हुए एक अन्य आवेदन को आधार बनाया गया। इसके बाद छह नवंबर 2025 को एक दूसरा आदेश जारी कर दिया गया। इस दूसरे आदेश के जरिए चेस्टर हिल परियोजना के अन्य चरणों से जुड़े मामलों को भी जबरन शामिल कर लिया गया, जबकि वे मामले उस मूल अपील का हिस्सा थे ही नहीं। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में हलचल तेज हो गई है।

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
Bureaucracy Dispute Himachal Administration Himachal News IAS Officers War Shimla Court

Join WhatsApp

Join Now