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Minor Rape Case: स्कूल से अगवा कर नाबालिग से किया था दुष्कर्म, 2 वर्ष बाद ‘एक रिपोर्ट’ ने खोल दीवान की पोल!

POCSO Court Decision: रामपुर की पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी ललित मोहन को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, जहां डीएनए रिपोर्ट को सबसे पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य माना गया।
Published on: 24 June 2026
Shimla News, Minor Rape Case Decision: Shimla News: Sirmour News

Minor Rape Case Decision: अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो कोर्ट) रामपुर ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक संवेदनशील मामले में फैसला सुनाते हुए दोषी ललित मोहन (32 वर्ष) को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस पूरे मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने डीएनए (DNA) रिपोर्ट को सबसे पुख्ता और अचूक वैज्ञानिक साक्ष्य मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।

इस संवेदनशील मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए उप-जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने बताया कि यह घटना नवंबर 2022 की है। उस समय पीड़िता की उम्र महज 14 वर्ष थी और वह नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी। दोपहर के समय जब पीड़िता अपनी सहेलियों के साथ स्कूल के मैदान में बैठी हुई थी, तभी आरोपी ललित मोहन अपनी गाड़ी लेकर वहां पहुंच गया।

आरोपी ने बहला-फुसलाकर सभी लड़कियों को अपनी गाड़ी में बैठा लिया और उन्हें घुमाने के लिए ले गया। उस समय गाड़ी के भीतर दो अन्य व्यक्ति भी पहले से ही मौजूद थे। कुछ दूरी पर जाने के बाद आरोपी ललित मोहन ने चालाकी से पीड़िता की सहेलियों को गाड़ी से नीचे उतार दिया। इसके बाद वह पीड़िता को जबरन ‘काशंग नाला’ की तरफ ले गया, जहां उसने गाड़ी के अंदर ही नाबालिग के साथ दुष्कर्म की खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

इस घटना के बाद पीड़िता बुरी तरह डर गई थी, जिसके कारण उसने लोक-लाज और खौफ के मारे इस वारदात के बारे में अपने परिवार या किसी भी अन्य व्यक्ति को कुछ नहीं बताया। इस घटना का खुलासा दिसंबर 2022 में हुआ, जब पीड़िता के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ। दर्द से तड़पती बेटी को देखकर उसकी मां उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गई।

अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने जब पीड़िता का प्रेगनेंसी टेस्ट किया, तो वह पॉजिटिव आया। इस बात की जानकारी मिलते ही डॉक्टरों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना दी। इसके बाद जब लोक-लाज से परे मां ने कड़ाई से अपनी बेटी से पूछताछ की, तो पीड़िता ने रोते हुए अपने साथ हुई पूरी आपबीती सुनाई। इसके तुरंत बाद पुलिस थाना रिकांगपिओ में पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

अदालती कार्यवाही के दौरान इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पीड़िता के भ्रूण का डीएनए (DNA) टेस्ट कराया गया। इस वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट में यह पूरी तरह से साबित हो गया कि आरोपी ललित मोहन ही उस भ्रूण का बायोलॉजिकल (जैविक) पिता था। इस अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य और पीड़िता के बयानों को मुख्य आधार मानते हुए अदालत ने दोषी को इस सख्त सजा से दंडित किया। अदालत में सरकार की ओर से इस पूरे मुकदमे की प्रभावी पैरवी उप-जिला न्यायवादी कमल चंदेल द्वारा की गई।

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