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Shimla News: डीएसपी विजय कुमार के उत्पीड़न मामले में राष्ट्रीय आयोग ने हिमाचल डीजीपी को भेजा सख्त नोटिस

Published on: 2 July 2026
Shimla News: डीएसपी विजय कुमार के उत्पीड़न मामले में राष्ट्रीय आयोग ने हिमाचल डीजीपी को भेजा सख्त नोटिस

Shimla News: हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे में चल रही आपसी खींचतान अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने शिमला के डीएसपी (मुख्यालय) विजय कुमार द्वारा लगाए गए जाति आधारित उत्पीड़न के आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस संवेदनशील मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दिया है।

इस नोटिस के जरिए आयोग ने पुलिस प्रशासन से अगले 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। बता दें कि इस बड़े विवाद की पृष्ठभूमि में डीएसपी विजय कुमार की एक लिखित शिकायत है। डीएसपी विजय कुमार ने बीते 3 जून 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को एक पत्र भेजा था। इस लिखित शिकायत में उन्होंने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए थे।

उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि पुलिस महकमे के भीतर उनके साथ जानबूझकर जाति आधारित अत्याचार और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला उत्पीड़न किया जा रहा है। राष्ट्रीय आयोग ने इस शिकायत को प्रथम दृष्टया जांच के योग्य पाया और तुरंत एक्शन मोड में आ गया। आयोग के सीनियर इन्वेस्टिगेटर प्रवीण चंद्र दियुंडी की ओर से जारी इस आधिकारिक नोटिस में हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे को बहुत सख्त चेतावनी दी गई है।

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि यदि तयशुदा 15 दिनों की समयसीमा के भीतर पुलिस मुख्यालय से कोई संतोषजनक जवाब या रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती है, तो आयोग हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेगा। ऐसी स्थिति में, भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत आयोग को प्राप्त अपनी ‘सिविल कोर्ट’ (दीवानी अदालत) जैसी शक्तियों का इस्तेमाल किया जाएगा।

संवैधानिक शक्तियों के प्रयोग की चेतावनी देते हुए आयोग ने साफ किया है कि रिपोर्ट न मिलने पर डीजीपी और मामले से संबंधित अन्य बड़े अफसरों को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी किया जा सकता है। आयोग ने इस जारी किए गए नोटिस की एक प्रति शिकायतकर्ता डीएसपी विजय कुमार को भी सूचनार्थ भेजी है।

इससे यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग अब सीधे राष्ट्रीय स्तर से की जा रही है। राष्ट्रीय आयोग द्वारा मांगी गई इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।

दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई एक बेहद अजीबोगरीब घटना से हुई थी, जिसने हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे के भीतर चल रही गहरी गुटबाजी और आपसी मतभेदों को सरेआम कर दिया था। आरोपों के अनुसार, सीनियर अफसरों ने डीएसपी विजय कुमार की सरकारी गाड़ी सिर्फ इसलिए छीन ली थी, क्योंकि उन्होंने अपने पूर्व एसएसपी को सरकारी गाड़ी में लिफ्ट दे दी थी। इस कथित अपमान और प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज होकर डीएसपी ने छोटा शिमला थाने में बाकायदा रपट भी दर्ज कराई थी।

अब इसी पुरानी घटना में जातिगत उत्पीड़न का गंभीर एंगल जुड़ने और सीधे राष्ट्रीय आयोग के दखल देने के बाद से हिमाचल पुलिस पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है। आयोग का यह कदम राज्य पुलिस प्रशासन के लिए इसलिए भी बड़ी मुसीबत बन गया है क्योंकि शिकायत को सीधे डीजीपी स्तर पर जवाब तलब करने के लायक माना गया है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी खलबली मची हुई है। अब सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि पुलिस मुख्यालय इस नोटिस पर आयोग को क्या जवाब भेजता है।

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