AC Paralysis Myth: गर्मियों के मौसम की शुरुआत होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक डराने वाला दावा बहुत तेजी से वायरल होने लगता है। इस वायरल दावे में अक्सर यह कहा जाता है कि रात भर एसी में सोने के कारण सुबह उठते ही व्यक्ति का मुंह टेढ़ा हो गया। आम जनता के बीच इस बात को लेकर काफी डर और भ्रम देखा जा रहा है कि क्या वास्तव में ठंडी हवा में सोने से पैरालिसिस (लकवा) की समस्या हो सकती है।
इस गंभीर विषय और सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रम को पूरी तरह दूर करने के लिए न्यूरोसर्जन अमित ने इसके पीछे का पूरा सच सामने रखा है। डॉक्टर ने इस बात को पूरी तरह साफ किया है कि एसी में सोने से पैरालिसिस होना महज एक अफवाह और मिथक है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर जिस समस्या का जिक्र बार-बार किया जाता है कि सुबह उठते ही मुंह टेढ़ा हो गया, वह वास्तव में शरीर की ‘फेशियल नर्व’ (चेहरे की नस) की आंतरिक समस्या के कारण होता है।

इसके अलावा, अचानक से हाथ-पैर का काम बंद कर देना, शरीर का सुन्न पड़ जाना या पैरालिसिस हो जाना जैसी गंभीर स्थितियों का कारण एसी या एसी की हवा बिल्कुल भी नहीं होती है। चिकित्सकीय दृष्टिकोण से स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ये तमाम समस्याएं असल में शरीर के अंदर होने वाली विभिन्न मेडिकल कंडीशंस की वजह से पैदा होती हैं।
लोग अक्सर इस गलतफहमी का शिकार इसलिए हो जाते हैं क्योंकि ये लक्षण सुबह के समय दिखाई देते हैं और रात भर घर में एसी चल रहा होता है। डॉक्टर के अनुसार, सिर्फ इसलिए कि सुबह उठते ही ये लक्षण दिखाई दिए और रात भर एसी चल रहा था, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि इस बीमारी का मुख्य कारण एसी ही है। दोनों के बीच ऐसा कोई संबंध नहीं है।
इस महत्वपूर्ण जानकारी के साथ ही उन्होंने आम जनता को एक बेहद जरूरी चेतावनी भी जारी की है। डॉक्टर अमित ने कहा है कि यदि आपको, आपके परिवार में या आपके किसी भी रिश्तेदार में अचानक ऐसा कोई लक्षण दिखाई दे, जिसमें मुंह टेढ़ा हो गया हो, हाथ-पैर में किसी भी प्रकार की कमजोरी महसूस हो रही हो या फिर अचानक बोलने में तुतलाहट आने लगी हो, तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें।
लोग अक्सर इसे एसी का कोई सामान्य साइड इफेक्ट या ठंडी हवा का असर समझकर घरेलू इलाज करने लगते हैं या समय बर्बाद करते हैं। इसे एसी का साइड इफेक्ट समझकर इग्नोर करना भारी पड़ सकता है, इसलिए ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस दावे को पूरी तरह खारिज करने के लिए उन्होंने अस्पतालों का एक व्यावहारिक उदाहरण भी सामने रखा है।
उन्होंने कहा कि लगभग हर व्यक्ति ने अपने जीवन में कभी न कभी किसी न किसी अस्पताल का दौरा जरूर किया होगा। अस्पतालों के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू), वीआईपी या प्राइवेट रूम, जनरल वार्ड और यहां तक कि ऑपरेशन थिएटर में भी हर जगह चौबीसों घंटे एसी लगा होता है।
यदि वास्तव में एसी की हवा से पैरालिसिस या लकवा जैसी कोई गंभीर शारीरिक दिक्कत होती, तो क्या कभी अस्पतालों में मरीजों के इलाज वाले स्थानों पर एसी का इस्तेमाल किया जाता? अस्पतालों में एसी का होना ही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि एसी से पैरालिसिस होने का दावा पूरी तरह आधारहीन है।


















