MLA Fund Scam Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश के देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने विधायक ऐच्छिक निधि के सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। न्यूज़ 18 हिमाचल की एक खबर के मुताबिक हिमाचल प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस नोट में इस कार्रवाई की पुष्टि की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसकी प्राथमिक जांच के बाद धर्मशाला थाने में 16 जुलाई को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 और 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि होशियार सिंह ने देहरा से विधायक रहते हुए अपनी निजी फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में लाभार्थी के रूप में 50-50 हजार रुपये की किश्तें डाली थीं। इसके बाद इन कर्मचारियों से करीब 8 लाख रुपये की यह पूरी रकम नकद के रूप में वापस ले ली गई।
विजिलेंस ब्यूरो ने अपनी प्राथमिक जांच के दौरान संबंधित बैंक रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेजों और शिकायतकर्ताओं सहित अन्य गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण किया। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान जिन लोगों के नाम पर विधायक ऐच्छिक निधि से वित्तीय सहायता मंजूर की गई थी, उन्होंने कभी इसके लिए आवेदन ही नहीं किया था।
गवाहों और कथित लाभार्थियों ने जांच के दौरान यह स्वीकार किया है कि बैंक खातों में सहायता राशि आने के बाद, उन्होंने पूर्व विधायक के निर्देश पर पैसे नकद निकालकर उन्हें सौंप दिए थे। बैंक और दस्तावेजी साक्ष्यों से साफ हुआ है कि सरकारी धन का इस्तेमाल तय नियमों के विपरीत हुआ और कागजी लाभार्थियों को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला।
मामले में आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। विजिलेंस ने कहा है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
बता दें कि होशियार सिंह देहरा सीट से दो बार निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। साल 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुए सियासी घटनाक्रम के बाद उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। इसके बाद हुए उपचुनाव में वह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर से चुनाव हार गए थे। गौर करने वाली बात यह है कि जिस अवधि में विधायक निधि के इस कथित हेरफेर को अंजाम दिया गया, उस समय वह तकनीकी रूप से निर्दलीय विधायक थे और भाजपा में शामिल नहीं हुए थे।


















