Pralhad Joshi Profile: कॉकरोच जनता पार्टी के उग्र आंदोलन के चलते धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार, 25 जुलाई को जारी एक प्रेस रिलीज में इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार होने के कुछ ही घंटों बाद, देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया। अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वह कर्तव्य और विनम्रता की भावना के साथ इसे स्वीकार करते हैं और पीएम नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे।

दिल्ली बुलावा और नई जिम्मेदारी
जब यह राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा था, तब प्रह्लाद जोशी कर्नाटक में अपने संसदीय क्षेत्र में एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। उन्हें रविवार, 26 जुलाई को दिल्ली लौटना था, लेकिन उससे पहले ही नई दिल्ली से फोन आने पर वह हुबली हवाई अड्डे से फ्लाइट पकड़कर शनिवार शाम साढ़े 7 बजे दिल्ली पहुंच गए, जहां उन्हें शिक्षा मंत्रालय संभालने के निर्देश दिए गए।
बता दें कि 64 साल के प्रह्लाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब वह देश के शिक्षा मंत्री का प्रभार भी संभालेंगे। जोशी की गिनती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और भरोसेमंद संकटमोचकों में होती है।
राजनीतिक सफर और बैकग्राउंड
27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयनगर में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने SSLC न्यू इंग्लिश स्कूल से शुरुआती पढ़ाई के बाद कर्नाटक यूनिवर्सिटी से संबद्ध हुबली के केए कॉलेज से बीए की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1995 में बीजेपी जिलाध्यक्ष के रूप में की थी।
प्रह्लाद जोशी साल 2004 से लगातार कर्नाटक के धारवाड़ (पूर्व में धारवाड़ नॉर्थ) लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने जा रहे हैं। वह 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार विजयी रहे हैं। 2019 से वह मोदी सरकार में मंत्री हैं और 2019 से 2024 के बीच कोयला, खान और संसदीय मामलों के मंत्री रह चुके हैं।
प्रह्लाद जोशी को ही क्यों चुना गया?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष NEET पेपर लीक विवाद पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। प्रह्लाद जोशी के पास 2019 से 2024 तक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री रहने का लंबा अनुभव है। उनके पास विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सामंजस्य बिठाने और गर्मागर्म बहस को संभालने की क्षमता है।
30 साल के लंबे राजनीतिक करियर और कई मंत्रालयों के संचालन के अनुभव को देखते हुए पीएम मोदी ने इस संवेदनशील मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार उन्हें सौंपने का रणनीतिक फैसला लिया है।
संपत्ति और पारिवारिक विवरण
2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, प्रह्लाद जोशी और उनकी पत्नी ज्योति जोशी का पेशा समाज सेवा और बिजनेस है। उनकी तीन बेटियां हैं, जिनमें अनन्या जोशी भी शामिल हैं। परिवार के पास कुल 21.09 करोड़ रुपये की संपत्ति (8.97 करोड़ रुपये चल और 12.11 करोड़ रुपये अचल) और 8.01 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।
व्यक्तिगत संपत्ति: प्रह्लाद जोशी के पास 2.72 करोड़ रुपये, पत्नी ज्योति जोशी के पास 5.93 करोड़ रुपये और बेटी अनन्या के पास 32.03 लाख रुपये की संपत्ति है।
कीमती धातुएं: प्रह्लाद जोशी के पास 184 ग्राम सोना और 5 किग्रा चांदी है; ज्योति जोशी के पास 500 ग्राम सोना और 2 किग्रा चांदी है; अनन्या के पास 250 ग्राम सोना है।
जमीन और वाहन: प्रह्लाद जोशी के नाम हुबली और बेंगलुरु में कमर्शियल व रेजिडेंशियल जमीन है, जबकि पत्नी के पास धारवाड़ में कृषि भूमि है। दिलचस्प बात यह है कि पांच बार के सांसद के परिवार के नाम कोई कार या बाइक दर्ज नहीं है।


















