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Baghat Bank Solan: RBI के अल्टीमेटम के बीच CM सुक्खू का मास्टरस्ट्रोक!, सरकार ने बघाट बैंक के खाते में जमा कराए ₹20 करोड़

Himachal Pradesh Baghat Bank Revival: हिमाचल सरकार ने बघाट बैंक के खाते में 20 करोड़ रुपये जमा कराकर अपना वादा पूरा किया। RBI के लिक्विडेशन अल्टीमेटम के बीच खाताधारकों को राहत मिली है, वहीं डिफाल्टरों पर कड़ा शिकंजा कसा जा रहा है।
By PNT
Published on: 30 July 2026
Baghat Bank Solan: वित्तीय संकट में घिरे बैंक को बचाएगी सरकार, 100 डिफाल्टरों के वारंट जारी

Baghat Bank Solan News: सोलन के चर्चित बघाट बैंक को वित्तीय संकट से उबारने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने कंडाघाट के क्यारी बंगला में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा था कि सरकार बघाट बैंक को किसी भी स्थिति में डूबने नहीं देगी। अपने इस बयान के तुरंत बाद शिमला पहुंचते ही शाम 4 बजे राज्य सरकार ने बैंक के खाते में 20 करोड़ रुपये की सहायता राशि हस्तांतरित कर दी।

सुक्खू सरकार द्वारा 20 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दिए जाने की सूचना मिलते ही बघाट बैंक प्रशासन में खुशी की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री द्वारा वादा निभाए जाने के बाद अब बैंक प्रशासन को अपने स्तर पर 15 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का इंतजाम करना होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो सप्ताह के भीतर बैंक के 20 बड़े डिफाल्टर इस राशि को जमा कर सकते हैं, क्योंकि एआरसीएस (ARCS) की अदालत ने डिफाल्टरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि मौजूदा समय में बघाट बैंक की आर्थिक स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। बैंक की नेटवर्थ गिरकर माइनस 26 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गई है, जिसे दोबारा पॉजिटिव में लाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। वहीं, बैंक का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट पहले 120 करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, रिकवरी अभियानों के कारण स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और वर्तमान में एनपीए घटकर 112 करोड़ रुपये रह गया है।

सरकार की ओर से तैयार किए गए व्यापक रिवाइवल प्लान और 20 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय सहायता से बैंक के हजारों खाताधारकों और शेयरधारकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, बैंक को इस आर्थिक दलदल से निकालने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। ऋण न चुकाने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। सहायक पंजीयक की अदालत की तरफ से 100 से अधिक बड़े डिफाल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं।

प्रशासन की इस सख्ती के तहत हाल ही में बैंक के सबसे बड़े ऋण डिफाल्टर को गिरफ्तार किया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मामले में अब तक लगभग 16 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। आने वाले दिनों में कड़ी कार्रवाई के चलते यह आंकड़ा 250 के पार पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान में बैंक के लगभग 380 मामले एनपीए श्रेणी में दर्ज हैं और डिफाल्टरों से करीब 112 करोड़ रुपये की भारी राशि वसूल की जानी बाकी है।

उल्लेखनीय है कि बघाट बैंक पर यह संकट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उस निर्देश के बाद गहराया था, जिसमें बैंक की खराब स्थिति को देखते हुए कार्रवाई की बात कही गई थी। बीते जून महीने में आरबीआई ने सहकारिता विभाग को पत्र भेजकर बैंक का लाइसेंस रद्द करने और इसे लिक्विडेट करने का सुझाव दिया था। इसके लिए आरबीआई ने 31 जुलाई तक की समयसीमा तय की थी। हालांकि, राज्य सरकार ने सहकारिता विभाग के माध्यम से एक ठोस पुनरुद्धार योजना आरबीआई को सौंप दी है ताकि बैंक को बंद होने से बचाया जा सके।

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