Sirona Furniture Theft: आजकल हमारे शहर सिरोना में अनुशासन का ऐसा कड़ा माहौल बना हुआ है कि अगर परिंदा भी पर मारता है, तो पहले उसकी चाल-ढाल और आईडी कार्ड चेक किया जाता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि बड़े साहब आजकल पूरे इलाके में ‘मार्शल-मार्शल’ का खेल खेल रहे हैं। उनका दावा है कि उनके एक इशारे पर हवाएं भी नियम से चलती हैं।
किसी दिन एक सीधा-साधा नागरिक उनसे सवाल पूछ बैठता है कि, “साहब, बाकी अनुशासन तो ठीक है, पर जो फर्नीचर गायब करवाया हुआ है, वह लकड़ी का फर्नीचर कहाँ चला गया?” यह सुनकर हमेशा कड़क रहने वाले साहब तुरंत भावुक होकर आसमान की तरफ हाथ उठा देते हैं और जयकारा लगाते हैं—”जय शंकर की! त्रिकालदर्शी सब देख रहे हैं!”

नागरिक भी कहाँ कम था, उसने तुरंत माथा ठोकते हुए कहा कि, “प्रभु, जब सब देख ही रहे हैं, तो यह भी बता दीजिए कि इस चोरी की रिपोर्ट उत्तर, दक्षिण, पूरब या पश्चिम, आखिर कौन से थाने में दर्ज कराई गई है?”
चोरी का नाम सुनते ही साहब के अनुशासन का थर्मामीटर सीधे सौ डिग्री पर पहुँच गया और वे गुस्से में उबलते हुए चिल्लाए कि, “मेरे शहर में चोरी… ऐसी अनर्गल बातें करने की हिम्मत कैसे हुई तुम्हारी! तुम्हें क्या लगता है? कम से कम 100-150 दिन के लिए सीधे जेल बनवा के अंदर करवा दूँगा! चौबीसों घंटे CCTV की निगरानी होगी, बंदूकों के कड़े घेरे में रखा जाएगा और तुम्हारे ऊपर ऐसा मार्शल लॉ लागू करूँगा कि जिंदगी भर याद रखोगे! हवलदार गजोधर सिंह को सब जानते हैं।”
बेचारा नागरिक डरने के बजाय हँस पड़ा और बोला कि, “अरे भाई साहब, शांत हो जाइए। मैं कोई विचाराधीन कैदी थोड़े ही हूँ जो आप बात-बात पर जेल की धमकी दे रहे हैं? मैं तो बस सीधा सवाल पूछ रहा हूँ कि जब बड़े साहब के कार्यकाल में ही थाने का फर्नीचर खिसक गया, तो हम रिपोर्ट ढूँढने कहाँ जाएँ?”
इस पर साहब ने बात घुमाते हुए कहा कि, “अरे, पूरब-पश्चिम कहीं न कहीं तो रिपोर्ट होगी ही, तुम यह सब छोड़ो, मार्शल मैडम को सब पता है!”
बातचीत के दौरान साहब थोड़े ढीले पड़े और पुरानी यादों में खोते हुए बोले कि, “कल शाम सात बजे मुझे भी बहुत प्यार से बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि तू भी मार्शल बन जा, तो मैंने साफ कह दिया कि मेरी घरवाली बहुत कड़क है, वह नहीं मानेगी; तो उन्होंने मुझे छोड़ दिया। पर असली बात तो यह है कि अभी मुझे फौजी कैंटीन जाना है, दफ़्तर के लिए विशेष राशन-पानी यानी बोतलें लेकर आनी हैं!”
नागरिक ने हैरान होकर पूछा कि, “दफ़्तर में कौन पीता है भाई?”
साहब ने गर्व से छाती ठोककर कहा कि, “हमारे दफ़्तर में सब पीते हैं भाई, सब! बाकायदा लाइसेंस मिला हुआ है हमारे दफ़्तर को! ख्याली राम से पूछ लो, दुनिया भर के सारे बड़े ब्रांड्स हमारे दफ़्तर में सजे रहते हैं!”
नागरिक ने याद दिलाया कि, “आजकल सामाजिक जालक्रम पर तो आ रहा है कि इसी चक्कर में कई लोग सस्पेंड भी हो चुके हैं।”
तो साहब ने ठहाका मारते हुए चुटकी ली कि, “सस्पेंड तो कीड़े-मकोड़े होते हैं, ‘दबंग’ थोड़ी न सस्पेंड होता है!”
जब नागरिक ने हौसला दिखाते हुए फिर से फर्नीचर का मुद्दा छेड़ा, तो साहब ने गंभीर चेहरा बनाकर गुप्त जानकारी दी कि, “किसी ने बताया था कि सामान करतारपुर की तरफ देखा गया है। अब इसके लिए विशेष अपराध जांच विभाग की विशेष जाँच बिठानी पड़ेगी और कह्लूर तथा सुरग बराड़ी की तरफ सुराग-तराशी करने जाना पड़ेगा। पर अभी मेरे पास बिल्कुल टाइम नहीं है, क्योंकि कल नशे के खिलाफ बहुत बड़ा जलसा है और आज रात उसकी प्री-पार्टी रखी गई है! मुझे तो सिर्फ ‘इंड्री’ ब्रांड का ही शौक़ है!”
तभी ख्याली राम के फोन की घंटी बजी, जो सतर्कपुर से आई थी। साहब चहक कर बोले कि, “अरे सुनो, कल दफ़्तर में पहले ‘हवन’ होगा और हवन समाप्त होते ही जहाँ से भी मिले, ‘ब्लू लेबल’ खींच ली जाएगी। ख्याली भाई, तुम अब निकलो!”
इसी बीच महफ़िल में झंडेश्वर, चुटियाल, गोपटा, घाटोड़ और छालिया जैसे दिग्गजों की एंट्री हो गई। साहब ताली बजाकर चिल्लाए कि, “लो भाई, अब बनेगी कीड़े-मकोड़ों को मरोड़ने की असली योजना! आज मार्शल भर्ती का जश्न है, चेंगदू और बीजिंग हेडक्वार्टर तक हलचल मच जाएगी। आज झूंबा-झूंबा होगा, कल बैंड-बाजा बजेगा, छुछूँदर भी आएगा और खुफिया विभाग वाले भी आएँगे!”
नागरिक ने आख़िरी बार गिड़गिड़ाकर पूछा कि, “उसने तो भर्ती के नाम पर भंडारा भी लगा रखा है, पर यह तो बता दो कि फर्नीचर चोर कौन है, नहीं तो मैं प्रेस में खबर दे दूँगा!”
कड़क साहब एक बार हँसे और हवलदार को आवाज़ लगाई कि, “हवलदार गजोधर सिंह, ज़रा इसका आर्टिकल डिलीट करवा देना और हाँ, पहले उस शंकर सिटी वाले से पता करो कि फर्नीचर गया कहाँ, बाकी बातें बाद में देखी जाएँगी!”
वैसे असली बात तो यह है कि आज एक बड़ी इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई है, जिसका मुख्य मुद्दा यह तय करना है कि पहले से चल रहे एक बड़े फर्जी झांसे और फ्रॉड सर्टिफिकेट की सारी जिम्मेदारी आखिर किस पर फोड़ी जाए!
पिछले दो सालों तक तो सबने मिल-बैठकर मजे से खाया-पिया और आज तक किसी पर केस भी दर्ज नहीं होने दिया। पर अब टेंशन लेने की बात नहीं है, क्योंकि झंडेश्वर और चुटियाल जैसे माहिर खिलाड़ी कुछ न कुछ जुगाड़ करके इस पूरे मामले को दबा ही देंगे। साहब ने तो साफ़ हिदायत दे दी है कि इस फर्नीचर चोरी की ज्यादा चर्चा मत करो, वरना पश्चिम के थाने का हवलदार गजोधर सिंह ऐसा तगड़ा पर्चा डालेगा कि लेने के देने पड़ जाएँगे!
इधर ख्याली और किम्मी मार्शल मुख्यालय से पूरी कमान संभाले हुए हैं, तो लेपटा और त्यागी की टीम ‘मिशन उगाही’ के तहत सोलांग छू के लिए निकली थी, लेकिन रास्ता भटककर मणिपुर पहुँच गई! अब उधर सब कुछ चाहे जितना गड़बड़ा जाए, पर यहाँ हमारे मार्शल साहब मस्त होकर ‘झूंबा’ डांस करने में व्यस्त हैं, क्योंकि जब तक दफ़्तर में बोतलें और हाथ में मार्शल का तमगा है, तब तक फर्नीचर चोरी जैसे छोटे-मोटे मुद्दों में भला क्या रखा है!
नोट: “सुना है दुनिया में एक जैसी शक्ल वाले सात लोग होते हैं, पर क्या यह मुमकिन है कि एक ही वक्त पर उन सातों के मन में एक ही ख़्याल कौंधे? कल्पना कभी-कभी हकीकत से भी हाथ मिला लेती है। जब कोई बात हमारे सचेत मन से होकर गुजरती है, तो अवचेतन में पहुँचकर वह एक नई वास्तविकता रचने का हुनर सीख लेती है।”


















