Tenzing Norgay Award Baljeet Kaur: हिमाचल प्रदेश की बेटी और प्रोफेशनल एक्सट्रीम एथलीट एवं पर्वतारोही बलजीत कौर को देश के प्रतिष्ठित तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू साहसिक खेलों के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान करेंगी। बलजीत कौर के इस सम्मान से सोलन समेत पूरे हिमाचल में खुशी की लहर है।
बता दें कि केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने वर्ष 2024 के तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार की घोषणा कर दी है। ये पुरस्कार चार श्रेणियों – भू, जल तथा वायु साहसिक अभियानों तथा आजीवन उपलब्धि के लिए दिए जाएंगे। ये पुरस्कार साहसिक अभियानों में व्यक्तिगत उपलब्धियों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों में सहनशक्ति, जोखिम लेने की क्षमता, टीम वर्क और त्वरित एवं प्रभावी निर्णय लेने की भावना को बढ़ावा देने का प्रयास है। सरकार ने तेनजिंग नोर्गे 2024 पुरस्कार के लिए बलजीत कौर, स्कालज़ैंग रिगज़िन, रिमो साहा, शिव प्रसाद चमोली को चुना है।
सोलन जिले की कंडाघाट तहसील के एक छोटे से गांव से निकलकर देश और दुनिया के पर्वतारोहण मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने वाली बलजीत कौर की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है। उनके पिता अमरीक सिंह हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में बस चालक हैं, जबकि मां शांति देवी गृहिणी हैं। बचपन में बलजीत अपने तीन भाई-बहनों के साथ मां के साथ खेतीबाड़ी में भी हाथ बंटाती थीं। इसी साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने ऊंची चोटियों को अपना लक्ष्य बनाया।
बलजीत ने पर्वतारोहण में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम की हैं। 12 मई 2021 को उन्होंने नेपाल की 7,161 मीटर ऊंची माउंट पुमोरी चोटी पर तिरंगा फहराया और ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इसी वर्ष उन्होंने 8,167 मीटर ऊंची माउंट धौलागिरी को भी फतह किया।
उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। बलजीत ने माउंट एवरेस्ट, ल्होत्से और मकालू जैसी दुनिया की कठिन पर्वत चोटियों को महज 7 दिन, 2 घंटे और 8 मिनट में फतह कर अपनी असाधारण क्षमता का परिचय दिया। इसके अलावा उन्होंने 25 घंटे 20 मिनट में एवरेस्ट और ल्होत्से पर चढ़ाई पूरी कर यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव भी हासिल किया।
तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड के लिए चुने जाने पर बलजीत कौर ने इसे अपने लिए गर्व और विनम्रता का क्षण बताया। उन्होंने अपनी सफलता उन सभी लोगों को समर्पित की, जिन्होंने उनके पर्वतारोहण के सफर में उनका साथ दिया।
गांव की पगडंडियों से दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंचने वाली बलजीत कौर की उपलब्धि हिमाचल की बेटियों के लिए भी प्रेरणा है। उनका यह सम्मान साहसिक खेलों में प्रदेश की बढ़ती पहचान को और मजबूत करेगा। कंडाघाट जैसे छोटे से क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर यह पहचान हासिल करना उनके अदम्य साहस और समर्पण को दर्शाता है।
बलजीत कौर की इस उपलब्धि से उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग उनकी इस सफलता को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बता रहे हैं। पर्वतारोहण के क्षेत्र में बलजीत ने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलने के बाद यह पुरस्कार उनके करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय होगा, जो आने वाले समय में और अधिक उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु राष्ट्रपति भवन में 2025 के राष्ट्रीय खेल पुरस्कार के साथ ही तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार प्रदान करेंगी। पुरस्कार समारोह की तिथि की घोषणा अलग से की जाएगी। तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार के प्रत्येक विजेता को एक प्रतिमा, प्रमाण पत्र और 15 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। राष्ट्रीय चयन समिति की संस्तुतियों के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया है। समिति ने नामांकनों के मूल्यांकन और समुचित संवीक्षा द्वारा इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए विजेताओं का चयन किया।


















