Neeraj Bharti High Court Case: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) नीरज भारती ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी है। इस कानूनी लड़ाई को लेकर राज्य के राजनीतिक हलकों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। नीरज भारती की ओर से दायर याचिका पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में 16 सितंबर 2026 को पहली औपचारिक सुनवाई निर्धारित की गई है।
अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह याचिका ‘CWP/16047/2026, NEERAJ VS STATE’ के नाम से पंजीकृत की गई है। इस संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल केस को 16 सितंबर के लिए हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर-1 में सुनवाई की सूची में शामिल किया गया है। पूर्व विधायक नीरज भारती ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अपने बंद किए गए सोशल मीडिया अकाउंट को तुरंत प्रभाव से बहाल कराने की मांग उठाई है।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब नीरज भारती ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। पद छोड़ने के तुरंत बाद ही वे अपनी ही पार्टी, संगठन और राज्य सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया मंचों पर लगातार बेहद तीखे और हमलावर बयान दर्ज करा रहे थे। उनके इस आक्रामक रवैये और तीखी सार्वजनिक टिप्पणियों के दौर के बीच ही अचानक उनका सोशल मीडिया अकाउंट भारत में देखने के लिए ब्लॉक कर दिया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नीरज भारती के अकाउंट को बैन किए जाने की समय-सीमा सीधे तौर पर कांग्रेस संगठन के भीतर चल रहे उनके आंतरिक विवाद और राज्य सरकार पर की गई तीखी टिप्पणियों के कालखंड से मेल खाती है। हालांकि, तकनीकी या प्रशासनिक आधार पर उनका अकाउंट बंद किए जाने की आधिकारिक और निश्चित वजह क्या थी, इसका विवरण अभी तक सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं हो सका है।
इस पृष्ठभूमि के कारण हाईकोर्ट में होने जा रही पहली सुनवाई को राजनीतिक और कानूनी, दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सोशल मीडिया अकाउंट पर लगे बैन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अकाउंट की बहाली से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस होने की पूरी संभावना है।
उल्लेखनीय है कि नीरज भारती लंबे समय से अपने बेबाक और तीखे बयानों को लेकर सियासी सुर्खियों में बने रहे हैं। सोशल मीडिया मंचों पर जब भी उनकी कोई टिप्पणी या पोस्ट सामने आती थी, तो उस पर राज्य के राजनीतिक हलकों में जमकर चर्चा होती थी और कई बार बड़े राजनीतिक विवाद भी खड़े हो जाते थे।
यही वजह थी कि सोशल मीडिया पर उनके लगातार आक्रामक पोस्ट सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक तरह से सिरदर्द बनते जा रहे थे, जिसके बाद उनका अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। अब 16 सितंबर को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या निर्देश जारी करता है, इस पर प्रदेश के सभी राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।


















