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Vijaya Ekadashi 2026: 12 या 13 फरवरी, कब है विजया एकादशी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और क्या करें-क्या नहीं सब कुछ

फाल्गुन विजया एकादशी 2026: फाल्गुन माह की विजया एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना जाता है। तिथि 12 फरवरी सुबह 7:52 से शुरू होकर 13 फरवरी सुबह 9:55 तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। भगवान विष्णु की पूजा से जीवन की बाधाएं दूर
Published on: 11 February 2026
Vijaya Ekadashi 2026: 12 या 13 फरवरी, कब है विजया एकादशी? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और क्या करें-क्या नहीं सब कुछ

Falgun Vijaya Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन महीने की विजया एकादशी का बहुत महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन की हर बाधा दूर हो जाती है और पापों का नाश होता है।

भक्त इस दिन पूरे विधि-विधान से विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इस बार यह व्रत शुक्रवार 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। बता दें कि हिंदू पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को सुबह 07:52 बजे से होगी। यह तिथि 13 फरवरी को सुबह 09:55 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 13 फरवरी को की जाएगी।

इस बार फाल्गुन विजया एकादशी 2026 के दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 06:11 से 07:07 बजे तक रहेगा। प्रातः संध्या 06:39 से 08:02 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:45 से 01:25 बजे तक, विजय मुहूर्त 02:46 से 03:26 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 06:05 से 06:33 बजे तक और सायाह्न संध्या 06:08 से 07:31 बजे तक रहेगी। निशिता मुहूर्त 14 फरवरी की रात 12:37 से 01:32 बजे तक होगा। दिन में चर, लाभ और शुभ योग भी पूजा के लिए उत्तम माने गए हैं।

फाल्गुन विजया एकादशी पूजा की विधि 
सबसे पहले स्नान करके मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करें। भगवान विष्णु का जल से अभिषेक करें और पंचामृत से स्नान कराएं। पीला चंदन और पीले फूल चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं। व्रत का संकल्प लें और एकादशी की कथा सुनें या पढ़ें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। विष्णु-लक्ष्मी जी की आरती उतारें। तुलसी दल सहित भोग लगाएं और अंत में क्षमा प्रार्थना करें।

एकादशी पर कुछ नियमों का पालन जरूर करें। इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे अशुभ फल मिलने की मान्यता है। तुलसी के पत्ते तोड़ने से भी बचें। व्रत रखने वाले हों या नहीं, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इस दिन श्री विष्णु चालीसा का पाठ जरूर करें और तुलसी जी के सामने दीपक जलाएं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। प्रजासत्ता इसकी सटीकता की पुष्टि नहीं करता। भक्त अपनी श्रद्धा और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत और पूजा करें।

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