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धर्मशाला छात्रा मौत मामले में यूजीसी जांच में कॉलेज प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर

Dharamshala SC Student Death Controversy: हिमाचल के इस सरकारी कॉलेज में 19 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले में यूजीसी की जांच समिति ने संस्थान की विफलता को जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में सुरक्षा तंत्र की कमी और प्रशासनिक उदासीनता का गंभीर खुलासा हुआ है।
Dharamshala student suicide case धर्मशाला छात्र आत्महत्या मामले में यूजीसी जांच में कॉलेज प्रशासन की गंभीर लापरवाही उजागर

Dharamshala Student Death Case: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित एक सरकारी कॉलेज में 19 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले ने पूरे शैक्षणिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की पांच सदस्यीय तथ्यात्मक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कॉलेज प्रशासन के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां की हैं। जांच में सामने आया है कि संस्थान में वैधानिक निकायों का अभाव था और छात्रों के लिए कोई प्रभावी सहायता प्रणाली कार्य नहीं कर रही थी।

हिंदुस्तान टाइम्स कि एक रिपोर्ट के मुताबिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मृत छात्रा को कॉलेज के हितधारकों द्वारा पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया था। आश्चर्यजनक रूप से, कॉलेज के प्रधानाचार्य राकेश पठानिया को छात्रा की मृत्यु की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी। पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बावजूद कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई भी संपर्क या सहायता नहीं की गई, जो संस्थान की घोर लापरवाही को दर्शाता है।

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उल्लेखनीय है कि इस घटनाक्रम की शुरुआत 26 दिसंबर, 2025 को हुई जब छात्रा की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके पिता की शिकायत पर एक जनवरी, 2026 को तीन छात्रों पर रैगिंग और एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि, 17 फरवरी को धर्मशाला की एक अदालत ने सभी आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी। यूजीसी की टीम ने एक से आठ जनवरी के बीच कॉलेज का दौरा कर शिक्षकों, छात्रों, पुलिस अधिकारियों और पीड़ित परिवार से विस्तृत पूछताछ की थी।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि छात्रा बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। जुलाई 2025 में तीन विषयों में असफल होने के बाद उसे कॉलेज प्रशासन ने दोबारा प्रथम वर्ष में दाखिला लेने की सलाह दी थी, जबकि वह द्वितीय वर्ष की कक्षाएं अटेंड कर रही थी। अक्टूबर 2025 में छात्रा के पिता ने लिखित शिकायत दी थी कि उनकी बेटी को रैगिंग के माध्यम से प्रताड़ित किया जा रहा है और वह गहरे अवसाद में है, लेकिन कॉलेज ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

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यूजीसी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कॉलेज में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और एंटी-रैगिंग मैकेनिज्म या तो नियमों के अनुसार गठित नहीं थे या पूरी तरह से निष्क्रिय थे। इतना ही नहीं, कॉलेज में सीसीटीवी कैमरों का अभाव था और काउंसलिंग सेवाएं भी पूरी तरह से बंद पड़ी थीं। आंतरिक जांच प्रक्रियाएं भी अधूरी और खराब तरीके से प्रलेखित पाई गईं, जिसमें आरोपी शिक्षक से पूछताछ तक नहीं की गई।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) से संबद्ध इस सरकारी डिग्री कॉलेज में स्थिति इतनी खराब थी कि मौत के बाद भी कॉलेज प्रशासन यह दावा करता रहा कि मृतका उनकी छात्रा नहीं है, जबकि साथी छात्रों ने इसकी पुष्टि की थी। पैनल ने यह भी पाया कि कॉलेज में वार्षिक ड्रॉपआउट दर 40 प्रतिशत तक है। समिति ने अब सख्त अनुपालन, समितियों के पुनर्गठन और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत करने की सिफारिश की है।

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Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
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