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Himachal News: 40 लाख नहीं 4 हजार में हो जाता काम, सड़क बीच खंभों ने छीनी युवक की जिंदगी… आखिर हत्या का जिम्मेदार कौन ?

Himachal News: 40 लाख नहीं 4 हजार में हो जाता काम, सड़क बीच खंभों ने छीनी युवक की जिंदगी... आखिर हत्या का जिम्मेदार कौन ?

Himachal News: सिरमौर जिले के पांवटा साहिब के पुरुवाला इलाके में सड़क के बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभे पिछले कुछ दिनों से पूरे देश में चर्चा का विषय बने हुए थे। लेकिन बीते रविवार रात को इन्हीं खंभों ने एक 24 साल के युवक की जिंदगी छीन ली। दरअसल, पुरुवाला-बद्रीपुर राज्य मार्ग पर सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभे से टकराने के कारण बाइक सवार एक युवक की मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहे उसके साथी की हालत गंभीर है। घायल युवक का इलाज सिविल हॉस्पिटल पांवटा साहिब में चल रहा है।

जानकारी के अनुसार, सनवर अली (24 वर्ष), पुत्र जाफरदीन, निवासी भगवानपुर, अपने साथी के साथ संतोषगढ़ से राजमिस्त्री का काम करके घर लौट रहा था। अंधेरे में उसे सड़क पर खड़ा बिजली का खंभा नहीं दिखा, जिसके कारण उनकी बाइक खंभे से टकरा गई। इस हादसे में सनवर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहे युवक को गंभीर चोटें आई हैं।

बताया जा रहा है कि सनवर की शादी 24 फरवरी को हुई थी, और अभी चार महीने ही हुए थे। इस हादसे के बाद मृतक की पत्नी और मां की हालत भी बिगड़ गई, जिन्हें सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। मृतक के मामा और भाजपा नेता यूनुस अली ने बताया कि उन्होंने पुलिस स्टेशन में बिजली विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज की है।

उन्होंने इस हादसे के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए शवगृह में रखा गया है और अगले दिन परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

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पांवटा साहिब उपमंडल के पुरुवाला से बद्रीपुर राज्य मार्ग पिछले तीन महीनों से सुर्खियों में है। इस सड़क के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिसमें सड़क के बीचों-बीच बिजली बोर्ड की 11 और 33 केवी लाइनें दिखाई देती हैं। ये खंभे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। करीब दो महीने पहले भी इन खंभों की वजह से दो गाड़ियों में चार लोग घायल हो चुके हैं। 20 जून 2024 को नेशनल हाईवे 07 को पुरुवाला से बद्रीपुर जोड़ने वाले इस राज्य मार्ग के उन्नयन कार्य की शुरुआत हुई थी।

सड़क का पक्कीकरण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन जंबुखाला में पुल निर्माण का काम अभी चल रहा है। यह वही स्थान है, जहां डेढ़ साल पहले पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी की स्कॉर्पियो बरसात के दौरान दलदल में फंस गई थी। इसके बाद विधायक ने इस सड़क का मुद्दा लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के सामने उठाया था, जिसके बाद सड़क का टेंडर अवार्ड किया गया। 8.5 किलोमीटर सड़क के लिए 6 करोड़ 28 लाख रुपये का अनुमानित बजट था, जिसमें 4 करोड़ 18 लाख 62 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत हुआ।

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Himachal News: 40 लाख नहीं 4 हजार में हो जाता काम, सड़क बीच खंभों ने छीनी युवक की जिंदगी... आखिर हत्या का जिम्मेदार कौन ?

पत्राचार में ही फंसे रहे विभाग 

लोक निर्माण विभाग पिछले दो साल से बिजली बोर्ड को इन खंभों को हटाने के लिए पत्र लिख रहा है। बिजली बोर्ड ने खंभे हटाने के लिए 40 लाख रुपये और बिजली की तारों के लिए 3.5 लाख रुपये का अनुमान दिया है। लोक निर्माण विभाग ने इस राशि को कम करने के लिए कई पत्र लिखे हैं। पांवटा साहिब सबडिवीजन-1 के सहायक अभियंता योगेश वर्मा ने बताया कि बिजली के खंभे हटाने के लिए बिजली बोर्ड से कई बार पत्राचार किया गया है। 10 दिन पहले ही 3.5 लाख रुपये ट्रेजरी में जमा कराए गए हैं।

वहीं, सिरमौर जिला बिजली बोर्ड के अधीक्षण अभियंता वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि जब तक लोक निर्माण विभाग 40 लाख रुपये और दो डीटीआर ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने की राशि जमा नहीं कराता, तब तक खंभे नहीं हटाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले ये खंभे सड़क के किनारे थे, लेकिन सड़क चौड़ी होने के बाद ये बीच में आ गए हैं। जैसे ही लोक निर्माण विभाग पूरी राशि जमा कराएगा, खंभे तुरंत हटा दिए जाएंगे।

40 लाख नहीं 4 हजार में ही हो जाता खंभों को किनारे खड़ा करने का काम, आखिर जिम्मेदार कौन?

आपको बता दें कि तस्वीर में दिख रहे सड़क के बीचों-बीच खड़े बिजली के खंभों को अगर थोड़ा सा हटाकर सड़क के किनारे कर दिया जाता, तो इसके लिए 40 लाख रुपये नहीं, बल्कि महज 4 हजार रुपये में यह काम हो जाता, पूरी लाइन न हटाने की जरूरत ही न पड़ती।

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लेकिन कागजी कार्रवाइयों के चक्कर और बिजली व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की लापरवाही ने एक 24 साल के युवक की जिंदगी छीन ली। सवाल यह है कि इस लचर व्यवस्था का जिम्मेदार कौन? आलोचनाओं से बचने के लिए मुआवजा दे दिया जाएगा, लेकिन क्या उस युवक का खोया हुआ जीवन लौटाया जा सकता है? यह सवाल हमारी व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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