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Himachal News: कसौली में 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति  होगी सरकार के अधीन, 42 बीघा भूमि पर सरकार का कब्जा तय..!

Himachal News: कसौली में 200 करोड़ की बेनामी संपत्ति  होगी सरकार के अधीन, 42 बीघा भूमि पर सरकार का कब्जा तय..!

Himachal News:  सोलन जिले के कसौली क्षेत्र में 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बेनामी संपत्ति (Benami Property in Kasauli) के मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। डिवीजनल कमिश्नर की अदालत ने सोलन उपायुक्त द्वारा सुनाए गए आदेश को बरकरार रखते हुए संपत्ति को सरकार के अधीन करने की पुष्टि की है। इस संपत्ति में दर्जनों बीघा जमीन और उस पर बने बहुमंजिला फ्लैट शामिल हैं।

साल 2014 में हुआ था खुलासा, जांच में निकला बेनामी संपत्ति का सच

यह मामला 2014 में उस वक्त उजागर हुआ जब शिकायतकर्ता संतोष कुमार ने पुलिस को जानकारी दी कि कसौली के जौल, खड़ोली और शाकड़ी गांवों में जमीन खरीदकर फ्लैट बनाए जा रहे हैं। शिकायत में बताया गया कि इसमें करोड़ों रुपये का निवेश हुआ है और इसमें कई अज्ञात लोग शामिल हैं। जांच की जिम्मेदारी विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपी गई, जिसने मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए।

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छोटे गांव का मजदूर बना करोड़पति, जांच में खुली पोल

एसआईटी की जांच के दौरान यह पता चला कि छट्याण गांव का एक मामूली मिस्त्री और किसान, दाता राम, रातोंरात करोड़पति बन गया। उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपये की लेन-देन हुई थी। बाहरी राज्यों के लोगों ने उसके खाते का इस्तेमाल कर 42 बीघा जमीन खरीदी और उस पर बहुमंजिला इमारतें बनाईं।

मुख्य आरोपी और कंपनियों की साजिश बेनकाब

जांच में चार मुख्य आरोपी सामने आए: दाता राम, दीपक बरमानी, श्रुति बरमानी और दिल्ली की माउंटेंस एंड पाइंस लिमिटेड कंपनी। दाता राम के खाते में पैसा ट्रांसफर कर जमीन की खरीदारी की गई। आरोपियों के खिलाफ हिमाचल प्रदेश लैंड टेनेंसी एंड रिफॉर्म एक्ट, 1972 की धारा-118 के तहत मामला दर्ज किया गया।

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उपायुक्त और डिवीजनल कमिश्नर का फैसला

2019 में तत्कालीन उपायुक्त कृतिका कुल्हारी ने जमीन और फ्लैट को बेनामी संपत्ति घोषित कर सरकार के अधीन करने का फैसला सुनाया। इसे डिवीजनल कमिश्नर और हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन अंततः सभी अदालतों ने सोलन उपायुक्त के आदेश को सही ठहराया।

सरकार के खाते में जाएगी 42 बीघा भूमि

अब, 42 बीघा जमीन और उस पर बने फ्लैटों को सरकार अपने अधीन करेगी। यह फैसला बेनामी संपत्ति के खिलाफ सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है।

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