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Himachal Bhawan Delhi: हाईकोर्ट ने सरकार को दी बड़ी राहत, इसलिए अब अटैच नहीं होगा दिल्ली का हिमाचल भवन,

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शिमला:
Himachal Bhawan Delhi: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेली हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड को अपफ्रंट मनी लौटाने के एकलपीठ के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने सरकार के आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय लिया।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 94 करोड़ रुपये की राशि ब्याज सहित जमा करने के बाद यह रोक लगाने की गुहार लगाई थी। यह मामला वर्ष 2009 से जुड़ा है, जब लाहौल-स्पीति में 320 मेगावाट का प्रोजेक्ट सेली हाइड्रो कंपनी को आवंटित किया गया था।

कंपनी का दावा था कि सरकार की ओर से आवश्यक मूलभूत सुविधाएं न मिलने के कारण उन्हें यह प्रोजेक्ट बंद करना पड़ा। इस वजह से सरकार ने कंपनी द्वारा जमा किए गए 64 करोड़ रुपये के अपफ्रंट प्रीमियम को जब्त कर लिया था।

Himachal Bhawan Delhi Controversy: एकलपीठ का फैसला और खंडपीठ की रोक

13 जनवरी, 2023 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सेली हाइड्रो कंपनी की याचिका स्वीकार करते हुए सरकार को 64 करोड़ रुपये 7% ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद, सरकार ने इस आदेश को 28 अप्रैल, 2023 को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी।

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21 अगस्त, 2023 को खंडपीठ ने सरकार को राशि जमा करने की शर्त पर एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी। लेकिन सरकार समय पर राशि जमा करने में विफल रही, जिसके चलते 15 जुलाई, 2024 को अदालत ने फैसले पर लगी रोक हटा दी।

हिमाचल भवन कुर्क करने के आदेश

सरकार द्वारा राशि जमा न करने के कारण सेली हाइड्रो कंपनी ने अनुपालना याचिका दायर की। इस पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने 18 नवंबर, 2024 को हिमाचल भवन, नई दिल्ली को कुर्क करने और दोषी अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई करने के आदेश दिए।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार समय पर 64 करोड़ रुपये जमा कर देती, तो 29 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में अतिरिक्त भुगतान नहीं करना पड़ता। अब सरकार ने यह राशि ब्याज सहित कोर्ट में जमा कर दी है।

अब आगे क्या?

हाईकोर्ट ने सरकार से दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। खंडपीठ ने सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कंपनी को जमा राशि निकालने पर भी रोक लगा दी है। गौरतलब  है कि यह मामला सरकार और कंपनी के बीच लंबे समय से चलता आ रहा है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगली सुनवाई में क्या निर्णय होता है।

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