Himachal-Delhi Police Dispute: हिमाचल प्रदेश और दिल्ली पुलिस के बीच बुधवार को हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मामले में भाजपा ने हिमाचल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह पूरा विवाद प्रदेश सरकार के इशारे पर ही खड़ा किया गया है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा के नेता शिमला में लोकभवन पहुंचे।
गुरूवार को शाम चार बजे नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को बताया कि इस घटना ने सिर्फ प्रदेश की कानून-व्यवस्था को हिलाया ही नहीं, बल्कि देश के संघीय ढांचे, संवैधानिक नियमों और प्रशासन की निष्पक्षता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भाजपा ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने कुछ बड़े सवाल भी उठाए हैं
-क्या मुख्यमंत्री कार्यालय ने हिमाचल सदन को राजनीतिक पनाहगाह की तरह इस्तेमाल किया?
-क्या पुलिस को राजनीतिक दबाव में काम करने के लिए मजबूर किया गया?
-न्यायालय के आदेश के बावजूद दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में रुकावट क्यों डाली गई?
-क्या यह संघीय व्यवस्था की भावना के खिलाफ नहीं है?
-क्या राज्य सरकार ने संविधान की शपथ का सही मायने में पालन किया?
राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि एआई समिट के दौरान युवा कांग्रेस नेताओं द्वारा अर्धनग्न प्रदर्शन कर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उनका आरोप था कि यह प्रदर्शन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निर्देश पर किया गया। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रविरोधी कृत्य को लेकर दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज की गई है और दिल्ली पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि मामले में शामिल कुछ यूथ कांग्रेस नेताओं को हिमाचल सदन में ठहराया गया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि कमरों की बुकिंग मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक संरक्षण और सरकारी संसाधनों का उपयोग कर इन लोगों को पनाह दी गई?
उन्होंने जानकारी दी कि जब दिल्ली पुलिस को संकेत मिले कि कुछ आरोपी हिमाचल प्रदेश में छिपे हुए हैं, तो पुलिस रोहड़ू स्थित चांशल वैली होटल पहुंची और सौरभ सिंह (अमेठी, उत्तर प्रदेश), अरवाज (कानपुर) तथा सिद्धार्थ (मध्य प्रदेश) को गिरफ्तार किया। जयराम ठाकुर ने प्रश्न किया कि जिन व्यक्तियों का हिमाचल से कोई स्थायी संबंध नहीं है, वे यहां कैसे पहुंचे? क्या उन्हें राजनीतिक संरक्षण के तहत सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया गया?
उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मपुर पहुंचने पर दिल्ली पुलिस को अवैधानिक रूप से रोका गया। रात 8:11 बजे उनके खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज की गई, जबकि उनके पास सभी वैध दस्तावेज, सीजर रिपोर्ट और न्यायालय का आदेश मौजूद था। मजिस्ट्रेट द्वारा ट्रांजिट रिमांड दिए जाने के बाद भी पुलिस को आगे बढ़ने से रोका गया और वाहन जब्त करने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, लगभग 24 घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिससे दो राज्यों की पुलिस आमने-सामने आ गई। उन्होंने इसे संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार बताया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने राजनीतिक दबाव में पुलिस तंत्र का दुरुपयोग किया है, तो यह संविधान की शपथ का उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निर्देशों पर हिमाचल सरकार काम कर रही है और देवभूमि को राजनीतिक शरणस्थली में बदला जा रहा है।
जयराम ठाकुर ने राज्यपाल से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण की केंद्र सरकार के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की स्वतंत्र जांच हो तथा दोषी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अंतरराष्ट्रीय साख और कानून के शासन से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, रोहड़ू से युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार करने की कोशिश की थी। इस दौरान हिमाचल पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई। इस घटना ने प्रदेश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार की गुंडागर्दी करार दिया है। वहीं भाजपा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है।
उधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने केंद्र को चेतावनी दी कि शांत हिमाचल को अशांत करने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पर्यटन स्थल है और यहां आने वाले मेहमानों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विनय कुमार ने दिल्ली पुलिस के रोहड़ू से तीन युवा कांग्रेस नेताओं को बिना कानूनी प्रक्रिया के गिरफ्तार कर दिल्ली ले जाने के प्रयास को बहुत गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र की ऐसी गुंडागर्दी हिमाचल कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। बता दें कि यह विवाद अब दोनों तरफ से तीखी बयानबाजी में बदल चुका है और प्रदेश की राजनीति में गर्मी बढ़ा रहा है।















