Himachal Forest Fire News: हिमाचल प्रदेश में बढ़ती गर्मी और हीट वेव के अलर्ट के बीच जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। पर्यटन नगरी कसौली के साथ लगते जंगलों में सोमवार शाम को भड़की भीषण आग बुधवार को भी लगातार जारी रही। बता दें कि मंगलवार शाम होते-होते यह आग एयर फोर्स स्टेशन कसौली के बिल्कुल नजदीक तक पहुंच गई। स्थिति की गंभीरता और खतरे को देखते हुए भारतीय सेना को तुरंत मोर्चा संभालना पड़ा और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से आग बुझाने का बड़ा अभियान शुरू किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर बाद जंगेशू क्षेत्र की ओर से चीड़ की सूखी पत्तियों में अचानक आग भड़क उठी थी। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के चलते इस आग ने देखते ही देखते एक बहुत बड़े जंगल क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। सूखी चीड़ की पत्तियां इस मौसम में बारूद की तरह साबित हुईं, जिससे आग की लपटें तेजी से फैलती चली गईं। आग पर काबू पाने के लिए भारतीय वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों को विशेष रूप से तैनात किया गया है, जो पानी स्टोर करके जंगल के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और आसमान से पानी छोड़कर आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।
अधिकारियों ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जंगल में आग लगने का यह संवेदनशील मामला कसौली वायुसेना स्टेशन के पास हुआ है। आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन विभाग के दल और दमकल की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचने के बावजूद शुरुआत में इस पर काबू पाने में पूरी तरह असमर्थ रहीं। इसके बाद ही वायुसेना ने जंगल के विशेष रूप से दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में लगी आग को बुझाने के लिए अपने ‘हेलीकॉप्टरों को इस ऑपरेशन में शामिल किया।
इस बड़े ऑपरेशन के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा चंडीगढ़ की सुखना झील से भी पानी लाया गया। सेना के हेलीकॉप्टरों ने सुखना झील से पानी भरकर प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में डंपिंग की। एयर फोर्स के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि पायलटों द्वारा नाइट विजन गॉगल्स का उपयोग करके रात के समय भी ऑपरेशन चलाने की मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही, छावनी परिषद कसौली की फायर ब्रिगेड, एयर फोर्स स्टेशन की दमकल इकाई, कुठाड़ और परवाणू से पहुंची दमकल विभाग की गाड़ियों तथा सेना के जवानों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद कुछ हिस्सों में आग पर नियंत्रण पाया।
इस बीच, आगजनी की एक और घटना राजधानी शिमला के तारा देवी जंगल से भी सामने आई है। वहां आग भड़कने से पूरा शिमला शहर धुएं की मोटी चादर में घिर गया और कई हिस्सों में धुएं का गुबार दिखाई दिया। जिन स्थानों तक सड़क मार्ग की पहुंच उपलब्ध थी, वहां दमकल और वन विभाग की टीमों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जबकि पहाड़ी के दुर्गम क्षेत्रों में अभी भी स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में हर साल जंगल की आग एक बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। राज्य में औसतन 5 हजार से 10 हजार हेक्टेयर वन भूमि हर वर्ष इस आग की चपेट में आकर प्रभावित होती है। इन घटनाओं के कारण कीमती वन संपदा, नए पौधे, दुर्लभ जड़ी-बूटियां और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचता है। वन विभाग के आधिकारिक आंकलन के अनुसार, जंगल की आग से प्रदेश को हर साल 3 करोड़ से 5 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस बार समय-समय पर हुई बारिश के कारण आग लगने की घटनाएं पिछले वर्षों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम रही हैं। इसके बावजूद अब तक प्रदेश में जंगल की आग के करीब 200 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने आम लोगों से जंगलों के आसपास आग न जलाने, सिगरेट और अन्य जलती हुई वस्तुएं खुले में न फेंकने तथा किसी भी क्षेत्र में आगजनी की घटना दिखने पर उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है।

















