HP High Court News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और नई भर्तियों से जुड़े मुद्दे हमेशा से ही राज्य की राजनीति और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं। हाल ही में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए गए एक आधिकारिक हलफनामे में प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा खुलासा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक सरकार की ओर से पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार के विभिन्न सरकारी विभागों में इस समय 1 लाख से अधिक पद पूरी तरह से खाली पड़े हुए हैं। दरअसल , यह पूरा मामला हाईकोर्ट में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्तियों की प्रक्रिया को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सामने आया।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हो रही है। इसी मामले की विधिक कार्यवाही के हिस्से के रूप में राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष यह आधिकारिक डेटा हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे प्रदेश में सरकारी नौकरियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और प्रामाणिक आंकड़ा सार्वजनिक हुआ है।
अदालत में प्रस्तुत किए गए मुख्य सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हिमाचल प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 3,36,542 है। इन स्वीकृत पदों के मुकाबले, तय भर्ती नियमों के तहत वर्तमान में केवल 2,28,891 पदों पर ही नियमित या नियमानुसार कर्मचारी तैनात हैं। इस प्रकार, आंकड़ों के गणित के अनुसार प्रदेश के सरकारी विभागों में कुल 1,07,466 पद रिक्त चल रहे हैं, जिन्हें अभी भरा जाना बाकी है।
राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में आउटसोर्स और हालिया सीधी भर्तियों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की है। सरकार द्वारा अदालत को सौंपी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में कुल 14,619 लोगों को आउटसोर्स व्यवस्था के माध्यम से काम पर लगाया गया है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी दावा किया कि 1 जनवरी 2023 से भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाई गई है। पिछले साढ़े तीन वर्षों की अवधि में भर्ती नियमों के अनुसार सीधे तौर पर 10,989 पद भरे गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग और हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से 12,004 पदों पर नियुक्तियां की गई हैं।
आउटसोर्सिंग भर्ती से जुड़ी इसी मुख्य याचिका के साथ अदालत ने स्टाफ नर्सों की भर्ती से संबंधित एक अन्य याचिका पर भी गंभीर रुख अपनाया। खंडपीठ ने आउटसोर्स आधार पर 60 स्टाफ नर्सेज की आपूर्ति के लिए दी गई टेंडर मंजूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने भर्ती कमेटी की बैठक की कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड का संज्ञान लिया और स्पष्ट रूप से कहा कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य दावेदार कंपनियों को बाहर किए जाने का कोई वैध, तार्किक और स्पष्ट आधार बैठक के विवरण में दर्ज नहीं दिखता है।
हाईकोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि रिकॉर्ड में यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि किस आधार पर अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों को अयोग्य ठहराया गया और किसी एक विशेष कंपनी के पक्ष में मांग तय कर दी गई। इस प्रशासनिक विसंगति को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को इस टेंडर प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी के साथ एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने का सख्त आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सरकार द्वारा पेश किए गए इन नए हलफनामों और विस्तृत आंकड़ों का कानूनी अध्ययन करने के लिए अदालत से समय देने का अनुरोध किया। खंडपीठ ने इस टेंडर विवाद और मुख्य आउटसोर्स भर्ती मामले से जुड़ी सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़ दिया है तथा मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तिथि निर्धारित की है।


















