Himachal Panchayat Election: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में देरी पर सुक्खू सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को साफ निर्देश दिए है कि 30 अप्रैल 2026 से पहले राज्य में पंचायत चुनाव करवाओ। कोर्ट ने चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्थाओं को बचाने के लिए चुनाव को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायतीराज विभाग, चुनाव आयोग और राज्य सरकार को 28 फरवरी तक साथ मिलकर बैठकर समय पर चुनाव की योजना बनाने को कहा है। बता दें कि न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की बेंच ने शुक्रवार सुबह यह अंतिम फैसला सुनाया है। आदेश के मुताबिक, 20 फरवरी 2026 से चुनाव प्रक्रिया शुरू करवानी होगी और 30 अप्रैल तक मतदान पूरा करना होगा।
उल्लेखनीय है कि बीते 7 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सरकार ने कहा था कि नई पंचायतों के गठन में समय लगेगा, परीक्षाएं, जनगणना और बारिश की वजह से फरवरी-मार्च में चुनाव मुश्किल। कम से कम 6 महीने और 90 दिन लगेंगे। चुनाव आयोग ने भी यही तर्क दिए।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि पंचायत चुनाव टालने की उनकी कोई मंशा नहीं है। सरकार ने दलील दी कि प्रदेश में नई पंचायतों, पंचायत समितियों और नगर निगम की परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है, जिसके चलते समय पर चुनाव करवाने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ रही हैं।
लेकिन याचिकाकर्ता ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि सरकार जानबूझकर टाल रही है, आपदा का बहाना बना रही। पुरानी जनगणना पर ही चुनाव करवाएं, क्योंकि संविधान कहता है कि कार्यकाल खत्म होने के 6 महीने में नए चुनाव जरूरी। जिसमे सरकारी मशीनरी पूरी तरह फेल हो गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया था कि समय पर चुनाव करवाना सरकार का संवैधानिक दायित्व है और परिसीमन जैसी गतिविधियों का हवाला देकर इन्हें नहीं टाला जा सकता।
बता दें कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने में सरकार द्वारा की जा रही देरी के खिलाफ अधिवक्ता डिक्कन ठाकुर सहित अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि पंचायत चुनावों को लेकर जानबूझकर विलंब किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने वाला है, लेकिन अभी तक चुनाव संबंधी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। जबकि नियमों के अनुसार पंचायत का कार्यकाल पूरा होने से कम से कम छह माह पहले चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इसके बावजूद राज्य चुनाव आयोग की ओर से अब तक केवल एक खंड में आदर्श आचार संहिता लागू की गई है। इस मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार और राज्य चुनाव आयोग को प्रतिवादी बनाया गया था।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत राज संस्थाओं का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को समाप्त हो रहा है। प्रदेश में सत्ताधारी सुक्खू सरकार ने पंचायत चुनावों को स्थगित करने के पीछे यह दलील दी है कि प्रदेश अभी भी मानसून के दौरान आई आपदा के असर से उबर रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की हालत अब भी खराब है और अनेक मार्ग बंद पड़े हैं, ऐसे में समय पर चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष दल भाजपा लगातार सरकार पर निशाना साधती रही है।










