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Himachal की सुक्खू सरकार पर जयराम का हमला: Atal Medical University शिफ्ट करने का फैसला ‘संकीर्ण सोच’ का प्रतीक, आपदा प्रभावितों की अनदेखी जारी

Himachal News की सुक्खू सरकार पर जयराम का हमला: Atal Medical University शिफ्ट करने का फैसला 'संकीर्ण सोच' का प्रतीक, आपदा प्रभावितों की अनदेखी जारी
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Himachal Pradesh: स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के मौके पर जहां सरकार से नई योजनाओं या संस्थानों की घोषणा की उम्मीद की जाती है, वहां हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मौजूदा संस्थानों को शिफ्ट करने का फैसला लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। दरअसल, स्वतंत्रता दिवस के राज्यस्तरीय समारोह में सीएम सुक्खू ने अटल मेडिकल एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी को नेरचौक से सरकाघाट स्थानांतरित करने की घोषणा है।

इस मामले को लेकर पूर्व सीएम और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल की सुक्खू सरकार पर तीखा जुबानी हमला किया है। जयराम ठाकुर ने इसे सरकार की ‘संकीर्ण सोच’ का प्रतीक बताते हुए कड़ी आलोचना की है। उन्होंने विशेष रूप से अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी (Atal Medical University) के शिफ्टिंग के फैसले को लेकर सवाल उठाए जा हैं, जो नेरचौक में पिछले पांच साल से सुचारू रूप से संचालित हो रही है।

पूर्व सीएम और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर का कहना है कि सरकार को ऐसे संस्थानों को मजबूत करने पर फोकस करना चाहिए था, लेकिन इसके उलट शिफ्टिंग के फैसलों से विकास की गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि, “सरकार कभी कहती है कि इसे यहां ले जाना है, तो कभी हमीरपुर में शिफ्ट करने के लिए जमीन तलाशने के काम पर मुख्यमंत्री ने कुछ लोगों को लगा दिया था। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।”

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सरकार का कार्यकाल आधे से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन नई योजनाओं को शुरू करने और उन्हें क्रियान्वित करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जयराम ने आरोप लगाया है कि सरकार चीजों को उलझाने में लगी हुई है। “चलते हुए संस्थानों को बंद करना, जिन प्रोजेक्ट्स के टेंडर हो चुके थे उन्हें रोकना, उनका बजट वापस मांगना और चलते कामों को ठप करना, यह वर्तमान सरकार की प्रिय शगल बन गई है,”

Himachal Pradesh: आपदा प्रभावितों के स्पेशल पैकेज की घोषणा कर खामोश बैठ गई सरकार

इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंडी के बाद कुल्लू, शिमला, ऊना, लाहौल और किन्नौर जिलों में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं से भारी तबाही मची है। अनुमानित रूप से हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। चार दिन की कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने आपदा प्रभावितों के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा तो की, लेकिन उसके बाद चुप्पी साध ली। प्रभावितों के लिए कोई गंभीर प्रयास नजर नहीं आ रहे।

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आपदा को डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सरकार की ओर से राहत कार्यों में कोई तेजी नहीं दिख रही। विपक्ष ने मांग की है कि मुख्यमंत्री को विकास योजनाओं पर फोकस करना चाहिए और आपदा प्रभावितों की मदद के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।

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