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Himachal: कुफरी में घोड़ों और पर्यटकों का बोझ, NGT ने वहन क्षमता और लीद प्रबंधन पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट..!

Himachal: कुफरी में घोड़ों और पर्यटकों का बोझ, NGT ने वहन क्षमता और लीद प्रबंधन पर मांगी विस्तृत रिपोर्ट..!

Himachal News: शिमला जिला के ठियोग प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सूचित किया है कि कुफरी में घोड़ों की लीद के प्रबंधन और पर्यटन गतिविधियों के प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करने के लिए एक योजना तैयार की जाएगी। इस योजना में घोड़ों की लीद के उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव और आर्थिक लाभ-हानि का आकलन शामिल होगा।

13 फरवरी, 2025 को एनजीटी ने ठियोग के डीएफओ को निर्देश दिया कि वे अपनी रिपोर्ट में कुफरी की वहन क्षमता (कैरींग कैपेसिटी) को स्पष्ट करें, विशेष रूप से घोड़ों और पर्यटकों के संदर्भ में। यह निर्देश आवेदक शैलेंद्र कुमार यादव की शिकायत के बाद जारी किया गया था, जिसमें कुफरी में घोड़ों के अनियंत्रित प्रबंधन और पर्यटन गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय क्षति की ओर ध्यान दिलाया गया था।

गौरतलब है कि 5 नवंबर, 2024 को एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीपीसीबी) के सुझावों और घोड़ा मालिकों के एक पत्र पर विचार किया था। इस पत्र में घोड़ों की संख्या 1,029 से घटाकर 700 करने पर सहमति जताई गई थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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ठियोग के डीएफओ ने 10 फरवरी, 2025 को एक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें घोड़ों की लीद के प्रबंधन के लिए दो विकल्प सुझाए गए: खाद बनाना और ब्रिकेट बनाना। राज्य सरकार के वकील ने खाद बनाने को अधिक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बताया। हालांकि, एनजीटी ने इस रिपोर्ट को अधूरा मानते हुए कहा कि इसमें खाद बनाने की विस्तृत योजना, लागत विश्लेषण और दीर्घकालिक लाभ का उल्लेख नहीं है।

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एनजीटी ने जोर देकर कहा कि रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:

  1. घोड़ों की लीद की कुल मात्रा और उसे एकत्र करने, परिवहन और खाद बनाने की प्रक्रिया।
  2. खाद बनाने के लिए आवश्यक गड्ढों की संख्या, उनका डिजाइन और तैयार खाद का निपटान।
  3. परियोजना की कुल लागत और खाद के उपयोगकर्ताओं की जानकारी।
  4. अल्पकालिक लागत और दीर्घकालिक लाभ का विस्तृत विश्लेषण।

एनजीटी ने कहा कि बिना लागत विश्लेषण के किसी भी विकल्प को अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने डीएफओ को एक विस्तृत और व्यावहारिक योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, ताकि कुफरी के पर्यावरण और पारिस्थितिकी को हो रहे नुकसान को रोका जा सके।

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