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Himachal High Court: आपराधिक केस होने पर भी पासपोर्ट होगा रिन्यू, मंत्री विक्रमादित्य मामले में अदालत का स्पष्ट आदेश

Passport Renewal Rules: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि केवल लंबित आपराधिक मामले के आधार पर किसी नागरिक को पासपोर्ट रखने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
Published on: 11 July 2026
Himachal High Court: आपराधिक केस होने पर भी पासपोर्ट होगा रिन्यू, मंत्री विक्रमादित्य मामले में अदालत का स्पष्ट आदेश

Himachal High Court: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पासपोर्ट रिन्यूअल को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित है, तो केवल इसी आधार पर उसका पासपोर्ट रिन्यू करने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एकल जज के फैसले को चुनौती दी गई थी। दरअसल, केंद्र सरकार ने एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पासपोर्ट अधिकारियों को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह और कनिष्क स्वरूप के पासपोर्ट रिन्यू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।

मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने माना कि आपराधिक कार्यवाही लंबित होने का सीधा मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी नागरिक को पासपोर्ट रखने के अधिकार से हमेशा के लिए पूरी तरह वंचित कर दिया जाए। अदालत ने कानून की व्याख्या करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत की कार्यवाही के दौरान यह बात सामने आई कि याचिकाकर्ताओं ने केवल अपना पासपोर्ट रिन्यू कराने की मांग की थी, न कि तुरंत विदेश यात्रा पर जाने की अनुमति मांगी थी।

हाईकोर्ट ने इस अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि पासपोर्ट का रिन्यू होना और विदेश यात्रा की अनुमति मिलना, दोनों पूरी तरह से अलग-अलग बातें हैं। पासपोर्ट रिन्यू होने के बाद भी यदि संबंधित व्यक्ति को विदेश यात्रा करनी है, तो उसे अनिवार्य रूप से उस ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेनी होगी, जहां उसका आपराधिक मामला वर्तमान में चल रहा है।

बता दें कि खंडपीठ ने एकल जज के 25 जून 2025 के आदेशों को पूरी तरह सही ठहराते हुए पासपोर्ट अथॉरिटी को निर्देश दिया कि कानून के अनुसार आवेदकों के पासपोर्ट रिन्यू किए जाएं। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि पासपोर्ट का उपयोग करके विदेश यात्रा करना पूरी तरह से संबंधित आपराधिक अदालतों द्वारा लगाई गई शर्तों और उनकी विशेष अनुमति के अधीन ही होगा। बिना ट्रायल कोर्ट की अनुमति के विदेश यात्रा संभव नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले, एकल पीठ ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह और एक अन्य आवेदक की ओर से दायर याचिकाओं को स्वीकार किया था। उस दौरान एकल पीठ ने पासपोर्ट अथॉरिटी के उस आदेश को सिरे से रद्द कर दिया था, जिसमें रिन्यूअल प्रक्रिया के लिए अदालत से विदेश जाने की अनुमति लाने की शर्त अनिवार्य रूप से लगाई गई थी।

एकल न्यायाधीश ने 26 मई 2025 के पासपोर्ट अथॉरिटी के स्पष्टीकरण पत्र को कानूनन गलत ठहराते हुए रद्द किया था और अधिकारी को 10 दिनों के भीतर पासपोर्ट रिन्यू करने का आदेश दिया था। दूसरी ओर, पासपोर्ट अथॉरिटी का तर्क था कि चूंकि दोनों आवेदकों के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आपराधिक मामले लंबित हैं और उनकी पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट भी प्रतिकूल आई थी, इसलिए वे बिना संबंधित अदालत की अनुमति के पासपोर्ट रिन्यू नहीं कर सकते।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को अमान्य करते हुए सर्वोच्च अदालत के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6(2)(एफ) आपराधिक मामले लंबित होने पर पासपोर्ट नवीनीकरण पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती है। यह नियम केवल आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए हैं, न कि उसे स्थायी रूप से पासपोर्ट से वंचित करने के लिए।

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