Himachal News: सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार का हिमाचल में एक और ‘चंडीगढ़’ बसाने का सपना, शुरू होने से पहले विरोध के भंवर में फंसता हुआ नज़र आने लगा है। दरअसल, बद्दी के नज़दीक शीतलपुर क्षेत्र में प्रस्तावित ‘हिम-चंडीगढ़’ नामक महत्वाकांक्षी नए शहर को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि आग इस आंदोलन में सबसे पहले विधायक रामकुमार चौधरी की अपनी ही गृह पंचायत हरिपुर-संडोली से भड़की है।
विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने शीतलपुर में करीब 3400 बीघा ज़मीन के अधिग्रहण और हिमुडा को सौंपने का फैसला कैबिनेट में पारित कर लिया है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ज़मीन के असली मालिकों, यानी स्थानीय पंचायतों के लोगों और किसानों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। ग्रामीणों का आरोप है, “एकतरफा फैसला उन पर थोपा जा रहा है।”
गुस्साए ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी ज़मीन किसी भी हालत में सरकार को नहीं देंगे। इसी के विरोध में संडोली और मलपुर पंचायतों के लोगों ने शीतलपुर सामुदायिक केंद्र में बैठक कर सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का साफ कहना है कि किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। बद्दी इलाका पहले ही भारी प्रदूषण का शिकार है और शीतलपुर आखिरी हरा-भरा ग्रीन बेल्ट बचा है। यहां ज्यादातर लोग खेती और डेयरी से गुजारा करते हैं।
इस योजना का विरोध कर रहे लोगों को संगठित करने के लिए किसानों और स्थानीय लोगों ने संघर्ष समिति बना ली है। जिसमे अध्यक्ष भाग सिंह कुंडलस, उपाध्यक्ष चरण दास व दीवान चंद, महासचिव चिंतन कुमार चौधरी समेत कई पदाधिकारी चुने गए। समिति ने चेतावनी दी कि जल्द रणनीति बनाकर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा और हाईकोर्ट में अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर की जाएगी।
संघर्ष समिति के नेताओं ने बताया, कि “बद्दी पहले ही प्रदूषण के दलदल में फंसा है। शीतलपुर इस इलाके की आखिरी ग्रीन बेल्ट है। यहां के किसान खेती और डेयरी से अपना गुज़ारा करते हैं। सरकार का मकसद साफ है हमारी कीमती ज़मीन बिल्डरों के हवाले करके मुनाफा कमाना। यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
समिति ने दो मोर्चों पर कार्रवाई की रणनीति बनाई है, एक, ज़मीनी स्तर पर बड़े आंदोलन की तैयारी; और दो, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भूमि अधिग्रहण के खिलाऻ याचिका दायर करना। इससे पहले संडोली और मलपुर पंचायतों के लोगों ने शीतलपुर सामुदायिक केंद्र में बैठक कर सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ नारेबाजी की।
सरकार की यह योजना अगर ग्रामीणों के तीखे विरोध के चलते अटकती है, तो यह सुक्खू सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकती है। विधायक की अपनी पंचायत से ही शुरू हुआ यह विरोध आने वाले दिनों में कितना विस्फोटक रूप लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, शीतलपुर की हवा में सरकार के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के खिलाफ संघर्ष की गूंज साफ सुनाई दे रही है।
















