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Supreme Court On RERA: जानिए ! सुप्रीमकोर्ट ने गुस्से में क्यों कहा बंद करो RERA, कहा -डिफॉल्टर बिल्डर्स का बचाव करने वाली संस्था बना

Supreme Court Himachal Pradesh RERA office shift case: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को बड़ी राहत देते हुए RERA दफ्तर को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने की अनुमति दे दी। लेकिन कोर्ट ने यह साफ निर्देश दिया कि शिफ्टिंग के दौरान आम लोगों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। 
Published on: 12 February 2026
Supreme Court On RERA: जानिए ! सुप्रीमकोर्ट ने गुस्से में क्यों कहा बंद करो RERA, कहा -डिफॉल्टर बिल्डर्स का बचाव करने वाली संस्था बना

Supreme Court On RERA: देश की सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की कार्यप्रणाली पर बुधवार को कड़ी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेरा अब आम लोगों की सुरक्षा के बजाय गलत बिल्डर्स को बचाने का हथियार बन गया है। ऐसे में इसे पूरी तरह खत्म कर देना ही ठीक रहेगा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमालिया बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों से सवाल किया कि आखिर रेरा बनाई ही किसलिए गई थी? क्या यह आम आदमी के पैसे और सपनों की रक्षा के लिए थी या बिल्डर्स को राहत देने के लिए?

सीजेआई सूर्य कांत ने स्पष्ट कहा, “इस संस्था का अब सिर्फ डिफॉल्टर बिल्डर्स को सुविधा पहुंचाने का काम बचा है। इससे बेहतर है कि इसे बंद कर दिया जाए।” जजों का रुख काफी सख्त था और उन्होंने रेरा की मौजूदा स्थिति पर गहरा असंतोष जाहिर किया।

दरअसल, यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश के एक मामले की सुनवाई के दौरान आई। मामला था राज्य सरकार का फैसला, जिसमें रेरा का मुख्य दफ्तर शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इस फैसले के खिलाफ अपील हुई और मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट ने पिछले साल 13 जून 2025 के इस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट का कहना था कि सरकार ने शिफ्टिंग के लिए कोई वैकल्पिक जगह तय नहीं की। साथ ही 18 आउटसोर्स कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेजने की बात कही गई, जिससे रेरा का पूरा कामकाज रुक सकता था।

हालांकि  सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हाईकोर्ट के इस फैसले को पलट दिया और हिमाचल सरकार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने RERA दफ्तर को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने की अनुमति तो दे दी। लेकिन कोर्ट ने यह साफ निर्देश दिया कि शिफ्टिंग के दौरान आम लोगों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार की ओर से माना गया कि रेरा से जुड़े किसी भी आदेश या काम में रुकावट नहीं आएगी। बेंच ने यह भी कहा कि सिर्फ रेरा कार्यालय ही नहीं, अपीलीय ट्रिब्यूनल को भी धर्मशाला ले जाया जाए ताकि अपील करने वालों को इधर-उधर न भटकना पड़े।

राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने पैरवी की। बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार के ऐसे फैसले पर हाईकोर्ट की रोक हटाई है। इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के मुख्यालय को शिमला से धर्मशाला शिफ्ट करने के मामले में कोर्ट ने यही रुख अपनाया था।

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