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Bahra University - Shimla Hills

बागवानी विभाग ने तैयार की आम की छः नई किस्में……

Published on: 27 April 2023
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-एक कनाल भूमि में लगा सकेंगे आम के 44 पौधे।
कांगड़ा।
राज्य के बागवानी विभाग ने 1293 करोड़ रुपए से विश्व बैंक द्वारा प्रायोजित हिमाचल प्रदेश बागवानी विकास परियोजना(एचपीएचडीपी) के अंतर्गत फल संतति एवम प्रदर्शन केंद्र जाच्छ(नूरपुर) में लगभग 13 कनाल क्षेत्र ने आम की छः नई किस्मों के साथ 605 पौधों का बगीचा तैयार किया है। जिसमें पूसा अरुणिमा, पूसा लालिमा, पूसा सूर्या,पूसा श्रेष्ठा, मल्लिका तथा चौंसा किस्में तैयार की गई हैं। विभाग ने भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र नई दिल्ली से इन पौधों की कलमें लाकर पीसीडीओ केंद्र, जाच्छ में पौधों को तैयार किया गया है। इसमें रेज्ड बेड प्रणाली बनाई गई है जिस पर इन पौधों को लगाया गया है । इनकी सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम भी लगाया गया है। इन पौधों पर दूसरे वर्ष से ही फल लगना शुरू हो गए हैं लेकिन इनके बेहतर विकास के लिए फलों को तोड़ दिया गया है। परागन के लिए यहां मधुमक्खियों के लिए प्राकृतिक मड हाउस बनाए गए हैं।

विभाग ने इन किस्मों के अब तक 2500 पौधे तैयार किये हैं । इन पौधों को विभाग क्लस्टर में बागवानी कर रहे किसानों को मुहैया करवाएगा। इसके अतिरिक्त विभाग ने इस वर्ष आम,लीची, किन्नू, गलगल, पपीता तथा कटहल सहित अन्य फलों के 30 हज़ार पौधे तैयार कर बागवानों को उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा है। जिससे बागवान आधुनिक व वैज्ञानिक तरीके से आम के साथ अन्य फलों की खेती कर सकेंगे। रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए इस केंद्र में मनरेगा के तहत पंजीकृत लोगों को नर्सरी में काम के लिए लगाया जाता है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार के साथ बागवानी बारे तकनीकी ज्ञान भी प्राप्त हो रहा है।

नई किस्म की विशेषताएं
आम की पारंपरिक खेती(साधारण बागवानी) में पौधे से पौधे की दूरी 10 मीटर के करीब रखी जाती है जहां एक कनाल भूमि पर मात्र 4 पौधे ही लगते थे वहीं नई किस्म के तैयार होने से हाई डेंसिटी बागवानी करते समय अब पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर के करीब रख कर भूमि पर 44 पौधे लगाए जा सकते हैं यानी अब किसान अपनी सीमित भूमि से भी अधिक उत्पादकता के साथ ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगे।
राज्य के बागवानों की दशहरी,लंगड़ा, चौसा तथा संदूरी आम की फसल अन्य आम उत्पादक राज्यों की फसल के साथ पीक सीजन में बाजार में आती है । यह आम अधिकतर हरे व पीले रंग के ही होते हैं। जिस कारण बागवानों को प्रतिस्पर्धा के कारण उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता है। लेकिन आम की इन हाइब्रिड किस्मों में फल ऑफ सीजन यानी सिंतबर में तैयार होता है जोकि सिंदूरी और लाल रंग का होगा। जिससे हिमाचल के किसान-बागवान बाजार की प्रतिस्पर्धा में बने रहने के साथ सामान्य बागवानी की तुलना में उतने ही क्षेत्र में तीन से चार गुणा ज्यादा उत्पादन कर ऊंचे दाम पा सकेंगे।
तीन साल के बाद ये आम के पौधे पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। आम के इन पौधों की लंबाई केवल सात से आठ फ़ीट तक ही होगी जिससे किसानों को फल तोड़ने में भी आसानी होगी। इसके साथ ही आम के शौकीनों को नया स्वाद मिलेगा।

क्या कहते है बागवानी विभाग के अधिकारी
बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ कमलशील नेगी ने बताया कि वर्ष 2021 में विभाग ने भारतीय कॄषि अनुसंधान संस्थान, पूसा(नई दिल्ली) से आम की इन किस्मों की कलमें लाकर पीसीडीओ केंद्र, जाच्छ में बगीचा लगाकर पौधों की नई किस्में तैयार की है। इसके अतिरिक्त विभाग ने इस केंद्र में लीची, किन्नू, गलगल, पपीता तथा कटहल के पौधे तैयार किये हैं। जिनके पौधे भी सीजन पर किसानों को उपलब्ध करवाये जाएंगे। बागवानी विभाग किसानों को आधुनिक व वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कोर्स भी आयोजित करवाता है। इसके अतिरिक्त उन्हें प्रशिक्षण टूर पर भी भेजता है। उनका कहना है कि प्रदेश के बागवान इस प्रदर्शन केंद्र का जरूर भ्रमण करें ताकि वे आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से बागवानी करने के गुर सीख सकें।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सूक्खु प्रदेश को फल राज्य के तौर पर नई पहचान दिलाने के साथ बागवानों को आर्थिंक रूप से समृद्ध बनाने के लिये बागवानी विकास को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं।राज्य में फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए फल क्लस्टर/हब विकसित करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने कार्य शुरू करने की पहल की है। जिसके तहत हाई डेंसिटी प्लांटेशन और माइक्रो इरीगेशन सिस्टम को विकसित किया जाएगा।

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