परस राम भारती | कुल्लू
Kullu News: हिमाचल प्रदेश के मत्स्य विभाग द्वारा बुधवार को विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र की प्रसिद्ध ट्राउट वैली तीर्थन, फलाचन और जिभी घाटी की विभिन्न नदियों एवं नालों में लगभग 20 हजार ब्राउन ट्राउट मछली के बीज (फिंगरलिंग्स) छोड़े गए। इस अभियान का उद्देश्य ट्राउट मछली का संरक्षण, मत्स्य संसाधनों का संवर्धन, नदी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना तथा एंगलिंग (खेल मछली पकड़ने) पर्यटन को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर एसडीएम बंजार पंकज शर्मा, वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी दूनी चंद आर्य, ग्राम पंचायत तुंग के उपप्रधान दुनी चंद, तीर्थन संरक्षण एवं पर्यटन विकास संघ के अध्यक्ष वरुण भारती, समाजसेवी पवन ठाकुर तथा कुछ स्थानीय लोग उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से तीर्थन नदी में ट्राउट मछली के बीज छोड़कर संरक्षण अभियान में सहभागिता निभाई।

उपमंडल अधिकारी बंजार पंकज शर्मा ने कहा कि विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की तीर्थन घाटी यहां पर पाई जाने वाली प्रसिद्ध ट्राउट मछली, स्वच्छ नदियों, झरनों , प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखती है। इन्होंने कहा कि ट्राउट मछली न केवल इस क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है। इस प्रकार के संरक्षण अभियानों से ट्राउट मछलियों की संख्या में वृद्धि होगी और नदी का प्राकृतिक संतुलन भी मजबूत होगा। इसलिए यहां की नदी नालों में ट्राउट मछली का संरक्षण एवं संवर्धन जरूरी है।
तीर्थन घाटी के युवा समाजसेवी पवन ठाकुर ने कहा कि ट्राउट मछली का संरक्षण केवल मत्स्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने स्थानीय लोगों से नदियों और नालों को स्वच्छ बनाए रखने तथा अवैध रूप से मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में सहयोग करने का आह्वान किया।
वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी दूनी चंद आर्य ने बताया कि विभाग द्वारा ट्राउट संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समय-समय पर विभिन्न नदियों में मछली के बीज छोड़े जाते हैं। साथ ही स्थानीय समुदाय को भी संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे मत्स्य संसाधनों में वृद्धि होने के साथ-साथ प्रकृति आधारित पर्यटन को भी नई गति मिलेगी।
स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि तीर्थन नदी और ट्राउट मछली इस क्षेत्र की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर नदियों की स्वच्छता बनाए रखें और अवैध मछली शिकार पर रोक लगाएं, तो तीर्थन घाटी की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगी। इस प्रकार ट्राउट मछली संरक्षण, स्वच्छ नदियां और जीएचएनपी की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में यह अभियान एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
















