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Milky Mushroom: ब्लड शुगर नियंत्रण, बेहतर सेहत और किसानों को खेती के लिए सुनहरा अवसर

Published on: 30 August 2025
Milky Mushroom: ब्लड शुगर नियंत्रण, बेहतर सेहत और किसानों को खेती के लिए सुनहरा अवसर

Milky Mushroom Benefits: अगर आप ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो मशरूम की एक नई और अनूठी प्रजाति आपके लिए वरदान साबित हो सकती है। दरअसल, सोलन के खुम्ब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) ने तीन साल की गहन शोध के बाद मिल्की मशरूम की दो नई किस्में—डीएमआर मिल्की 321 और डीएमआर मिल्की 299 विकसित की हैं। यह मशरूम न केवल स्वाद में बेजोड़ है, बल्कि अपने औषधीय गुणों और उच्च पैदावार के कारण किसानों और उपभोक्ताओं के लिए भी खास है।

दूधिया सफेदी और बिना कड़वाहट का स्वाद
मिल्की मशरूम का नाम इसके दूधिया सफेद रंग से प्रेरित है, जो वाइट बटन मशरूम से भी अधिक चमकदार है। इसकी खासियत यह है कि इसमें कड़वाहट बिल्कुल नहीं होती, जिससे यह खाने में बेहद स्वादिष्ट है। परंपरागत मशरूम किस्मों की तुलना में यह 10 प्रतिशत अधिक उपज देता है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

सेहत के लिए वरदान
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एग्रो इकोनॉमिक रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं—सीएस वैद्या, एमएल शर्मा और एनके शर्मा—के अध्ययन के अनुसार, 100 ग्राम मिल्की मशरूम में 8.60 मिलीग्राम विटामिन सी और 5.85 मिलीग्राम विटामिन बी3 (नाइसिन) पाया जाता है। नाइसिन भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर और बायोएक्टिव कंपाउंड ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक हैं। यह मशरूम प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, कोलेस्ट्रॉल और पित्त संबंधी समस्याओं को कम करने में भी प्रभावी है। शाकाहारी लोगों के लिए यह प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत है।

खेती में आसानी, अधिक टिकाऊपन
मिल्की मशरूम की खेती 30-35 डिग्री सेल्सियस के उच्च तापमान में आसानी से की जा सकती है। इसे तैयार करने के लिए खाद की आवश्यकता नहीं होती; केवल भूसे में बीज डालकर इसे एक महीने में उगाया जा सकता है। यह मशरूम सात से आठ दिन तक खराब नहीं होता, जो इसे अन्य मशरूमों से अलग बनाता है। इसका अचार भी बनाया जा सकता है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है।

भारत में मशरूम उत्पादन का बढ़ता दबदबा
मशरूम उत्पादन में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है, जो चीन और जापान से पीछे है। हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले दो वर्षों में भारत जापान को पछाड़ सकता है। डीएमआर के 22 राज्यों में फैले 32 केंद्र विभिन्न मशरूम प्रजातियों पर शोध कर रहे हैं। डीएमआर-321 और डीएमआर-299 किस्मों का विकास इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

विशेषज्ञों की राय
डीएमआर के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया, “मिल्की मशरूम एक स्वदेशी प्रजाति है, जो भारत की मिट्टी और जलवायु के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। यह अन्य मशरूमों की तुलना में अधिक लाभकारी है।” वहीं, डीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. मनोज नाथ ने कहा, “तीन साल के शोध के बाद डीएमआर मिल्की 321 और 299 को विकसित किया गया है। ये दोनों किस्में स्वाद में कड़वाहट रहित और उच्च उपज देने वाली हैं।”

किसानों के लिए अवसर
मिल्की मशरूम की खेती न केवल आसान है, बल्कि इसका बीज भी डीएमआर द्वारा 15 दिनों में तैयार कर उत्पादकों को उपलब्ध कराया जाता है। खासकर दक्षिण भारत में इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जा रहा है। यह किसानों के लिए आय का एक नया और टिकाऊ स्रोत बन सकता है।

मिल्की मशरूम न केवल सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह किसानों के लिए भी लाभकारी साबित हो रहा है। इसके औषधीय गुण, आसान खेती और लंबी शेल्फ लाइफ इसे बाजार में एक लोकप्रिय विकल्प बना रहे हैं।अतिरिक्त जानकारी के लिए डीएमआर की वेबसाइट पर जाएं।

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