Google News Preferred Source
साइड स्क्रोल मेनू

फेक न्यूज़ और फर्जी मैसेज पर सुप्रीमकोर्ट सख्त, ट्विटर और केंद्र सरकार को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट, Himachal News,

प्रजासत्ता नेशनल डेस्क |
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्विटर और केंद्र सरकार को फेक न्यूज के मामले में नोटिस जारी किया है| कोर्ट ने फेक न्यूज़ और फर्जी मैसेज के जरिए घृणा फैलाने वाले ट्विटर कंटेंट और विज्ञापनों की जांच के लिए मैकेनिज्म बनाए जाने पर जवाब मांगा है|

गौरतलब है कि बीजेपी नेता विनीत गोयनका ने पिछले साल मई में याचिका दायर की थी, जिसमें फर्जी खबरों और भड़काऊ संदेशों के जरिए नफरत फैलाने वाले ट्विटर कंटेंट व विज्ञापनों की जांच करने की व्यवस्था करने की मांग की गई थी।

याचिका में कहा गया कि प्रतिष्ठित लोगों और गणमान्य लोगों के नाम पर सैकड़ों फर्जी ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट हैं। उन्होंने कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। भाजपा नेता ने कहा कि सोशल मीडिया खातों का उपयोग राजनीतिक दलों द्वारा “विरोधियों की छवि धूमिल करने के लिए” किया जाता है।

इसे भी पढ़ें:  23 हजार करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में CBI ने जारी किया लुकआउट सर्कुलर

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार ट्विटर पर लगभग 1,100 खातों और पोस्टों को ब्लॉक करने के लिए दबाव डाल रही है, जिसमें कहा गया है कि नवंबर के बाद से केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान विरोध से जुड़ी गलत सूचना और उत्तेजक सामग्री फैल रही है।

सरकार ने सोशल मीडिया, स्ट्रीमिंग और डिजिटल समाचार सामग्री को विनियमित करने के लिए मसौदा नियमों को भी तैयार किया है, जिसमें नैतिकता का एक कोड और समस्याग्रस्त सामग्री की रिपोर्ट करने और इसे हटाने के लिए एक तंत्र शामिल होगा।

केंद्रीय आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कल संसद में बोलते हुए ट्विटर, फेसबुक, लिंक्डइन और व्हाट्सएप का उल्लेख किया और कहा कि उनका भारत में व्यापार करने के लिए स्वागत है, लेकिन आपको भारत के संविधान का पालन करना होगा, आपको भारत के कानूनों का पालन करना होगा।”

इसे भी पढ़ें:  त्रिपुरा में कांग्रेस और माकपा की संसदीय टीम पर हमला

ट्विटर ने कहा कि इसने सभी सामग्री को बंद नहीं किया है, क्योंकि कंपनी मानती है कि सरकार के आदेश भारतीय कानूनों के अनुरूप नहीं थे। इसने कुछ खातों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया और भारत में कई अन्य लोगों तक पहुंच को अवरुद्ध कर दिया, हालांकि उनके पोस्ट देश के बाहर पढ़े जा सकते हैं।

YouTube video player
संस्थापक, प्रजासत्ता डिजिटल मीडिया प्रजासत्ता पाठकों और शुभचिंतको के स्वैच्छिक सहयोग से हर उस मुद्दे को बिना पक्षपात के उठाने की कोशिश करता है, जो बेहद महत्वपूर्ण हैं और जिन्हें मुख्यधारा की मीडिया नज़रंदाज़ करती रही है। पिछलें 9 वर्षों से प्रजासत्ता डिजिटल मीडिया संस्थान ने लोगों के बीच में अपनी अलग छाप बनाने का काम किया है।

Join WhatsApp

Join Now

प्रजासत्ता के 10 साल