Lok Sabha Privilege Notice: संसद के मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के बीच राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और पूर्व मंत्री अनुराग ठाकुर ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। अनुराग ठाकुर ने यह नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा है, जिसमें 29 जुलाई को सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा और व्यवहार को आधार बनाया गया है।
अनुराग ठाकुर का आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन में अपमानजनक, असंसदीय और मानहानि करने वाली भाषा का प्रयोग किया है, जो संसदीय मर्यादा के खिलाफ है और नियम 352(ii), (iii) और (vii) का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने भी राहुल गांधी के खिलाफ स्पीकर को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

क्या था राहुल गांधी का बयान?
दरअसल, 29 जुलाई को लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने किसी व्यक्ति का नाम न लेते हुए जंतर-मंतर पर एक महिला छात्र से हुई बातचीत का उल्लेख किया था। राहुल गांधी ने सदन में लोगों की तीन श्रेणियां बताई थीं, स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त।
राहुल गांधी ने इन श्रेणियों का ब्यौरा देते हुए कहा था कि ‘स्टूडेंट’ वे होते हैं जो खुले दिल और विचारों से सच्चाई के पीछे चलते हैं। छात्र के अनुसार, ‘इडियट’ वह अहंकारी व्यक्ति होता है जो खुद को भगवान मानता है और किसी की नहीं सुनता। वहीं, ‘अंधभक्त’ वह व्यक्ति होता है जिसे यह पक्का यकीन होता है कि वह ‘इडियट’ ही भगवान है।
सदन में हंगामा और राहुल गांधी की सफाई
राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के मंत्रियों, विशेषकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तुरंत कड़ा ऐतराज जताया था। अनुराग ठाकुर द्वारा दी गई शिकायत में इस बात का जिक्र है कि संसदीय कार्य मंत्री के विरोध और चेयर (पीठ) की स्पष्ट चेतावनी के बावजूद राहुल गांधी ने विवादित शब्द को दोहराया।
वहीं, इस आपत्ति के जवाब में राहुल गांधी ने सदन के भीतर स्पष्ट किया था कि वह किसी सदस्य या व्यक्ति विशेष का नाम लेकर यह बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि केवल छात्रों द्वारा कहे गए शब्दों को साझा कर रहे थे। हालांकि, राहुल गांधी द्वारा सदन में इस्तेमाल किए गए ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ शब्दों को लोकसभा की आधिकारिक कार्यवाही से हटा (एक्सपंज कर) दिया गया है।
क्या होता है विशेषाधिकार हनन?
विशेषाधिकार हनन तब होता है जब संसद या विधानमंडल के किसी सदस्य, सदन या उसकी समितियों के अधिकारों और विशेषाधिकारों का उल्लंघन या अपमान किया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 (संसद के लिए) और अनुच्छेद 194 (राज्य विधानमंडलों के लिए) के तहत सांसदों और विधायकों को विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं।
विशेषाधिकार हनन का मुख्य कारण संसदीय कार्यों में बाधा उत्पन्न करना, किसी सांसद को उसके कर्तव्य निभाने से रोकना, गलत बयानबाजी करना, सदन या सदस्यों पर झूठे व निराधार आरोप लगाना, सदन की अवमानना करना या सदन के आदेशों की अवहेलना करना होता है।
कैसे होती है प्रक्रिया और क्या हो सकता है एक्शन?
नियमों के अनुसार, जब कोई पीड़ित सांसद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति को विशेषाधिकार हनन का नोटिस देता है, तो उस पर निर्णय लेने का प्रारंभिक अधिकार अध्यक्ष के पास होता है। यदि अध्यक्ष नोटिस को प्रथम दृष्टया सही पाते हैं, तो मामले को विस्तृत जांच के लिए विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) के पास भेज दिया जाता है। अनुराग ठाकुर ने भी इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए इसे विशेषाधिकार समिति को भेजने की मांग की है।
यदि जांच के बाद विशेषाधिकार समिति राहुल गांधी को दोषी पाती है, तो उनके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके तहत लोकसभा अध्यक्ष राहुल गांधी को चेतावनी देकर छोड़ सकते हैं, उनसे सदन में माफी मांगने को कह सकते हैं, या फिर सदन में प्रस्ताव लाकर उन्हें सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित (निष्कासित) किया जा सकता है। यद्यपि एंटी पेपर लीक बिल संसद से पास हो गया है, परंतु इस विवाद के कारण नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के लिए नई विधायी मुश्किलें खड़ी होती दिख रही हैं।


















