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कैंसर मरीजों को बड़ा झटका! मोदी सरकार ने दी इन जीवनरक्षक दवाओं के दाम बढ़ाने की मंजूरी

Cancer Drug Shortage: देशभर के अस्पतालों में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन जैसी जीवनरक्षक कीमोथेरेपी दवाओं की भारी कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने इनकी कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
Cancer Medicines Price Hike in India: कैंसर मरीजों को बड़ा झटका! मोदी सरकार ने दी इन जीवनरक्षक दवाओं के दाम बढ़ाने की मंजूरी

Cancer Medicines Price Hike in India: देश में कैंसर इलाज व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण दवाओं की कीमत बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। यह अहम फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन जैसी अत्यंत आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी देशभर के अस्पतालों और प्रमुख कैंसर केंद्रों में महसूस की जा रही है।

सरकार का मानना है कि कीमतों में इस संशोधन से दवा निर्माताओं को अपना उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे बाजार में दवाओं की आपूर्ति में तेजी से सुधार हो सकेगा। इस संबंध में आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स ने 7 जून को नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी के मेंबर सेक्रेटरी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में स्पष्ट किया गया कि माननीय मंत्री (रसायन और उर्वरक) ने इन दवाओं के लिए डीपीसीओ (DPCO), 2013 के पैरा 19 का इस्तेमाल करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

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कीमतों में यह बदलाव इसी विशिष्ट पैरा 19 के तहत स्वीकृत किया गया है। यह एक विशेष प्रावधान है जो सरकार को सामान्य कीमत-नियंत्रण व्यवस्था से हटकर हस्तक्षेप करने की अनुमति देता है, जब उसे लगता है कि जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना या उन्हें किफायती बनाए रखना बेहद आवश्यक है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों से देशभर के स्वास्थ्य केंद्रों में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की उपलब्धता में लगातार गिरावट देखी जा रही थी।

गौरतलब है कि ये दोनों ही प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाएं हैं, जो फेफड़े, सर्वाइकल, ओवेरियन, सिर एवं गर्दन, ब्लैडर और कई अन्य घातक प्रकार के कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं के विकल्प बेहद सीमित हैं और कई गंभीर मामलों में ये दवाएं ही मरीज के इलाज का सबसे प्रभावी हिस्सा मानी जाती हैं।

रिपोर्ट में दवा उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस अभूतपूर्व संकट की सबसे बड़ी वजह प्लैटिनम की रिकॉर्ड कीमतों में आया उछाल है। पिछले एक वर्ष के भीतर प्लैटिनम की कीमत लगभग ₹2,000 प्रति ग्राम से बढ़कर ₹5,000 प्रति ग्राम से भी ऊपर पहुंच चुकी है। चूंकि इन विशेष दवाओं के निर्माण में प्लैटिनम ही सबसे प्रमुख कच्चा माल होता है, इसलिए इसकी कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत में भारी उछाल आया है।

उद्योग जगत का तर्क था कि सरकार द्वारा पहले से निर्धारित मूल्य सीमा के कारण कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का भार उपभोक्ताओं पर नहीं डाल पा रही थीं, जिससे कई निर्माताओं के लिए उत्पादन करना घाटे का सौदा साबित हो रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, दवा कंपनियों ने बाजार की चुनौतियों को देखते हुए करीब 82 दवाओं की कीमतों में संशोधन करने की मांग उठाई थी। विभिन्न मंत्रालयों के बीच गहन विचार-विमर्श के बाद, फिलहाल चार महत्वपूर्ण दवाओं के लिए मूल्य वृद्धि को हरी झंडी दी गई है, जिनमें कैंसर उपचार से जुड़ी ये जरूरी दवाएं भी शामिल हैं। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य उत्पादन को कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना और बाजार में इनकी तीव्र उपलब्धता को सुनिश्चित करना है।

इस कमी के कारण देश के कई बड़े अस्पतालों और कैंसर केंद्रों में मरीजों का इलाज सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। डॉक्टरों ने गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि कुछ मामलों में मरीजों की थेरेपी तक को टालना पड़ रहा है, या फिर उपलब्ध स्टॉक को लंबे समय तक चलाने के लिए दवाओं की डोज में बदलाव करने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट अधिक समय तक खिंचता है, तो हजारों मरीजों के स्वास्थ्य और उनके जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

हालांकि सरकार का यह फैसला बाजार में आपूर्ति को बहाल करने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन इससे आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर रोगियों के इलाज के खर्च को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। कैंसर का इलाज पहले से ही आम परिवारों के लिए काफी महंगा माना जाता है, ऐसे में दवाओं की कीमतों में होने वाली यह वृद्धि सीधे तौर पर मरीजों के परिवारों की जेब पर भारी वित्तीय बोझ डाल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को आपूर्ति दुरुस्त करने के साथ-साथ इन जरूरतमंद मरीजों के लिए राहत उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए।

दूसरी तरफ, फार्मा कंपनियों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति मिलने के बाद अब उत्पादन को फिर से तेजी से बढ़ाया जाएगा। लागत बढ़ने के कारण कुछ कंपनियों ने अपना उत्पादन बेहद कम कर दिया था, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से निर्माण कार्य पूरी तरह रोक दिया था। अब इस मूल्य संशोधन के बाद उत्पादन क्षमता में सुधार होने और बाजार में दवाओं की कमी दूर होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

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