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Justice Yashwant Varma: हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, आंतरिक जांच पैनल की रिपोर्ट को दी चुनौती

Justice Yashwant Varma Case : हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, आंतरिक जांच पैनल की रिपोर्ट को दी चुनौती
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Justice Yashwant Varma News: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का मामला जले हुए नोट मिलने से शुरू होकर एक संघर्ष में बदल गया है। दरअसल, दिल्ली के सरकारी आवास में आग लगने के दौरान जले हुए नोट मिलने के मामले में आरोपी हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वर्मा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस द्वारा नियुक्त आंतरिक जांच पैनल की रिपोर्ट को चुनौती दी है।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को 8 मई को की गई सिफारिश रद्द करने की मांग की है। जस्टिस यशवंत वर्मा ने महाभियोग से पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने आधी जली नकदी मामले में दोषी पाए जाने वाली जांच रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की है। जस्टिस वर्मा ने कहा है कि उनके खिलाफ जो कार्रवाई की गई वह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और उन्हें खुद को निर्दोष साबित करने का पूरा मौका नहीं दिया गया।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने क्या तर्क दिया?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिट याचिका में जस्टिस यशवंत वर्मा ने तर्क दिया है कि उनके आधिकारिक आवास के बाहरी हिस्से से नकदी की बरामदगी मात्र से उनपर दोष सिद्ध नहीं होता है, क्योंकि आंतरिक जांच समिति ने नकदी के मालिक या परिसर से उसे कैसे निकाला गया, इसका पता नहीं लगाया है।

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उन्होंने आंतरिक समिति के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि ये निष्कर्ष किसी ठोस सबूत के आधार पर नहीं, बल्कि कुछ अनुमानों और अटकलों के आधार पर दर्ज किए गए थे, जो पूरी तरह पुख्ता नहीं है। जस्टिस वर्मा ने यह भी कहा कि समिति ने उन्हें पर्याप्त अवसर दिए बिना पूर्व निर्धारित रिजल्ट पाने के लिए जल्दबाजी में यह प्रक्रिया अपनाई।

आंतरिक जांच रिपोर्ट को रद्द करने की मांग 

जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इनहाउस जांच समिति की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की है। यह रिपोर्ट 8 मई को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा तैयार की गई थी, जिसमें संसद से उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की गई थी।

क्या है मामला? (Justice Yashwant Varma Case)

बता दें कि होली की रात 14 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। उस वक्त वे और उनकी पत्नी भोपाल में थे। घर पर उनकी बेटी और बुजुर्ग मां मौजूद थीं। आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन कर्मियों ने एक स्टोर रूम में नकदी से भरे बोरों में आग लगी हुई देखी। इसके बाद घटनास्थल से दो वीडियो सामने आने पर इस मामले ने तूल पकड़ा और पुरे देश में चर्चा का विषय बना गया।

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