साइड स्क्रोल मेनू

यौन अपराधों में सिर्फ कानून नहीं, सहानुभूति भी जरूरी’, जजों के लिए बनेगी नई गाइडलाइंस

Supreme Court Guidelines: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित फैसले को पलटते हुए जजों के लिए नई गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों की सुनवाई में संवेदनशीलता और भारतीय सामाजिक मूल्यों का होना अनिवार्य है।
{{author_Name}}
Published on: 19 February 2026
Supreme Court guidelines for sexual offence cases 2026 यौन अपराधों में सिर्फ कानून नहीं, सहानुभूति भी जरूरी', जजों के लिए बनेगी नई गाइडलाइंस
Preferred_source_publisher_button.width-500.format-webp

Supreme Court guidelines for sexual offence cases 2026: सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई को और अधिक मानवीय तथा पीड़ितों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को निर्देश दिया है कि वह इन मामलों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार करे।

कोर्ट ने अपने दिशानिर्देश में साफ कहा कि ये गाइडलाइंस पूरी तरह भारतीय समाज की वास्तविक परिस्थितियों और मूल्यों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं। इनमें विदेशी कानूनी शब्दों या मॉडलों की नकल बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

बता दें कि यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिया। मामला 2025 में स्वतः संज्ञान पर लिया गया था। यह इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले से जुड़ा था। उस फैसले में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए अपराध को गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया था। जिसमें आरोपी ने लड़की के स्तन पकड़े, उसकी पायजामा की डोरी तोड़ी और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट ने उस इलाहाबाद हाईकोर्ट के हाईकोर्ट के आदेश को पहले ही गलत बताकर रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा कि कई बार न्यायालयों में इस्तेमाल होने वाली भाषा और टिप्पणियां पीड़ितों को और अधिक दुख पहुंचाती हैं।

उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर 2025 को दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यौन उत्पीड़न के मामलों में असंवेदनशील टिप्पणियां पीड़ितों, उनके परिवारों और पूरे समाज में डर का माहौल पैदा कर सकती हैं। इसे ‘चिलिंग इफेक्ट’ कहा जाता है, जो लोगों को न्याय मांगने से रोक सकता है।

अदालत ने कहा था कि वह इस दिशा में व्यापक निर्देश जारी करना चाहती है। अब राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को ये दिशानिर्देश तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। इस बदलाव के साथ आने वाले समय में इन गाइडलाइंस के लागू होने से यौन अपराधों की सुनवाई में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे पीड़ितों को ज्यादा सम्मान और संवेदनशीलता के साथ न्याय मिल सकेगा।

Join WhatsApp

Join Now