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MP High Court: अब बसों में दो दरवाजे अनिवार्य, नियमों की अनदेखी पर 45 दिनों में रद्द होंगे परमिट

MP High Court Bus Rules: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यात्री सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश की सभी बसों में प्रवेश और निकास के लिए दो अलग-अलग दरवाजे अनिवार्य कर दिए हैं। जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने RTO को 45 दिनों के भीतर मोटर वाहन नियमों का पालन
MP High Court: अब बसों में दो दरवाजे अनिवार्य, नियमों की अनदेखी पर 45 दिनों में रद्द होंगे परमिट

MP High Court: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने यात्री सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य की परिवहन व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने निर्देश दिया है कि प्रदेश की सभी स्टेज कैरिज और टूरिस्ट बसों में प्रवेश (Entry) और निकास (Exit) के लिए अलग-अलग दरवाजे होना अनिवार्य है। अदालत ने क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTO) को स्पष्ट आदेश दिया है कि आगामी 45 दिनों के भीतर इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

न्यायालय ने यह फैसला एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें याचिकाकर्ता की बस का परमिट राज्य परिवहन अपीलीय अधिकरण द्वारा रद्द कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि संबंधित बस मध्य प्रदेश मोटर वाहन नियम 1994 के नियम 164 और नियम 77(1-ए) के मानकों को पूरा नहीं कर रही थी। नियमों के अनुसार, बस में न्यूनतम सीट क्षमता 35+2 होनी चाहिए और बाईं ओर दो दरवाजों के साथ-साथ एक आपातकालीन द्वार (Emergency Exit) होना आवश्यक है।

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सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक जैन ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए यात्रियों की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस बात पर गहरा खेद प्रकट किया कि वर्तमान में संचालित कई वातानुकूलित (AC) और लग्जरी बसों में भी दो दरवाजे नहीं हैं। अदालत ने कहा कि आग लगने या किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में एक ही दरवाजा होना यात्रियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 5 जनवरी 2012 से पहले पंजीकृत बसों की भी गहन जांच की जाए। यदि कोई भी बस नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसे 45 दिनों के भीतर खामियों को सुधारने का समय दिया जाए। इस अवधि में नियमों का पालन न होने पर संबंधित बसों के संचालन पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।

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अदालत ने राज्य के सभी परिवहन प्राधिकरणों को पूरे प्रदेश में जांच अभियान चलाने और दोषी पाए जाने वाले बस ऑपरेटरों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को तय की गई है, जिसमें परिवहन विभाग को अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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