Google News Preferred Source
साइड स्क्रोल मेनू

Shoolini Litfest 2025: फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म से नहीं बल्कि अपनी मेहनत से स्थापित हुए हैं बडे कलाकार.!

Shoolini Litfest 2025: फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म से नहीं बल्कि अपनी मेहनत से स्थापित हुए हैं बडे कलाकार.!

Shoolini Litfest 2025: शूलिनी विश्वविद्यालय में आयोजित शूलिनी लिटरेचर फेस्टिवल के बहुप्रतीक्षित पांचवें संस्करण की शुरुआत जोश और उत्साह के साथ हुई। यह महोत्सव साहित्य, सिनेमा, संगीत और मीडिया की जानी-मानी हस्तियों के विचारों के अद्भुत संगम के रूप में सामने आया। पहले दिन के सत्रों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया, जहां अनुभवी अभिनेता कंवलजीत सिंह और वरिष्ठ पत्रकार विपिन पब्बी सहित कई दिग्गजों ने अपनी बातें साझा कीं।

पढ़ने की आदत पर कंवलजीत सिंह का जोर

डिजिटल युग में पढ़ने की गिरती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए अभिनेता कंवलजीत सिंह (Kanwaljit Singh) ने युवाओं से मोबाइल फोन छोड़कर किताबों की दुनिया में गोता लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “पढ़ने से शब्दावली और ज्ञान का विस्तार होता है, और यह वह दृष्टिकोण देता है जो कोई भी स्क्रीन नहीं दे सकती।”

इसे भी पढ़ें:  Neeraj Chopra Marriage: नीरज चोपड़ा ने गुपचुप तरीके से की शादी, सोशल मीडिया पर पोस्ट की तस्वीरें..!

वरिष्ठ पत्रकार और स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन के निदेशक विपिन पब्बी के साथ बातचीत में सिंह ने अपने करियर के दिलचस्प किस्से साझा किए। उन्होंने अपनी हालिया फिल्म ‘मिसेज’ के अनुभव को जीवन-परिवर्तनकारी बताया और दर्शकों को कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्म-विकास की महत्ता समझाई।

नेपोटिज्म पर बेबाक राय

अपने सत्र के बाद मीडिया से बात करते हुए, कंवलजीत सिंह ने सिनेमा इंडस्ट्री में नेपोटिज्म पर अपनी राय रखते हुए कहा कि हर क्षेत्र में यह देखने को मिलता है कि बच्चे वही पेशा अपनाते हैं जो उनके परिवार में पहले से चला आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया, “हर कलाकार नेपोटिज्म से नहीं आता। कई स्टार किड्स असफल भी हुए हैं, जबकि कई कलाकार अपनी मेहनत से शीर्ष तक पहुंचे हैं।”

इसे भी पढ़ें:  Pharmacy Council of India ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश के स्कूल ऑफ फार्मेसी को कोर्सज शुरू करने की दी मंजूरी
सिनेमा और थिएटर का अंतर

थिएटर और सिनेमा में अंतर पर चर्चा करते हुए सिंह ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने स्वीकार किया कि थिएटर की चुनौतियाँ अलग होती हैं और गालिब नाटक करने के दौरान उन्हें सपनों में भी डायलॉग भूलने का डर सताता था। हालांकि, बाद में उन्होंने थिएटर को आत्मसात कर लिया।

पहाड़ों से विशेष लगाव

मुंबई में रहने वाले कंवलजीत सिंह ने पहाड़ों के प्रति अपने प्रेम को भी व्यक्त किया। मसूरी में पढ़ाई करने के कारण हिमालयी क्षेत्र से उनका गहरा लगाव रहा है। उन्होंने कहा, “जब भी पहाड़ों में आता हूं, तो ऐसा लगता है जैसे बड़े भाई की बाहों में आ गया हूं।”

इसे भी पढ़ें:  Chandigarh: कारगिल विजय दिवस पर नशा मुक्त भारत और नारी शक्ति की प्रेरणा स्रोत बनीं CRPF कमांडेंट कमल सिसोदिया,

मर्सिडीज का दिलचस्प किस्सा

हास्य-व्यंग्य से भरपूर एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले वह मर्सिडीज खरीदने का सपना देखते थे। लेकिन जब पहली बार जर्मनी गए और वहाँ टैक्सियों को भी मर्सिडीज में चलते देखा, तो उन्होंने आज तक मर्सिडीज नहीं खरीदी।

YouTube video player
संस्थापक, प्रजासत्ता डिजिटल मीडिया प्रजासत्ता पाठकों और शुभचिंतको के स्वैच्छिक सहयोग से हर उस मुद्दे को बिना पक्षपात के उठाने की कोशिश करता है, जो बेहद महत्वपूर्ण हैं और जिन्हें मुख्यधारा की मीडिया नज़रंदाज़ करती रही है। पिछलें 9 वर्षों से प्रजासत्ता डिजिटल मीडिया संस्थान ने लोगों के बीच में अपनी अलग छाप बनाने का काम किया है।

Join WhatsApp

Join Now

प्रजासत्ता के 10 साल