Shimla News: हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ जारी अभियान के तहत जिला पुलिस शिमला ने वर्ष 2026 में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। पुलिस प्रशासन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस साल बैकवर्ड लिंकेज प्रणाली के माध्यम से गहन जांच करते हुए विभिन्न राज्यों से 59 मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय 75 नशा तस्करी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।
पुलिस विभाग का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों की तुलना में यह अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई सिद्ध हुई है। ताजा अभियान के अंतर्गत दो पृथक मामलों की गहन जांच करते हुए पुलिस की विशेष टीमों ने पड़ोसी राज्य पंजाब में सक्रिय कथित मुख्य सप्लायरों तक पहुंच बनाकर उन्हें दबोचने में सफलता पाई है। पहला मामला 15 जुलाई को पुलिस थाना सदर शिमला में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए स्पेशल सेल शिमला की टीम ने शहर के एक स्थानीय होटल में दबिश दी। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने लुधियाना निवासी सागर सिंह (19), आकाश (18) और अंकित कुमार (23) को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों के संयुक्त कब्जे से लगभग 21 ग्राम हेरोइन बरामद की गई, जिसके बाद एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 और 29 के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।
पुलिस द्वारा आरोपियों को हिरासत में लेकर की गई कड़ाई से पूछताछ, मोबाइल फोन के डिजिटल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) तथा डिजिटल वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण से अहम सुराग प्राप्त हुए। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि बरामद की गई हेरोइन लुधियाना के निवासी साहिल शर्मा से खरीदी गई थी। तकनीकी साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि आरोपी आकाश लगातार साहिल के संपर्क में बना हुआ था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 7 जुलाई 2026 को आकाश ने ऑनलाइन माध्यम से साहिल के बैंक खाते में तीन हजार रुपये स्थानांतरित किए थे, जबकि शेष राशि का भुगतान नकद रूप में किया जाना तय हुआ था। मोबाइल डेटा से हेरोइन की खरीद-फरोख्त से संबंधित बातचीत और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी बरामद हुई है, जिसे पुलिस ने महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य माना है।
इन पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस थाना सदर शिमला की एक विशेष टीम लुधियाना भेजी गई, जिसने 18 जुलाई को कार्रवाई करते हुए साहिल शर्मा को उसके निवास स्थान से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस द्वारा साहिल के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि उसके खिलाफ पूर्व में भी दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें वर्ष 2023 में चोरी का मामला और वर्ष 2025 में स्नैचिंग तथा अन्य धाराओं के तहत दर्ज केस शामिल हैं।
इसी कड़ी में दूसरा मामला 20 जुलाई को पुलिस थाना चिड़गांव में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। गश्त और नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर अमृतसर निवासी मनिन्दर सिंह (23) को रोका और तलाशी ली। उसके कब्जे से 16 ग्राम हेरोइन बरामद की गई, जिसके तुरंत बाद एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 और 29 के तहत मामला पंजीकृत किया गया।
हिरासत में पूछताछ के दौरान मनिन्दर सिंह ने खुलासा किया कि उसने यह नशीला पदार्थ अमृतसर निवासी सुखदीप सिंह उर्फ जैस गिल से प्राप्त किया था। प्रारंभिक खुलासे के बाद पुलिस टीम तुरंत अमृतसर के लिए रवाना हुई। जांच के दौरान मनिन्दर सिंह की निशानदेही पर उस स्थान का निरीक्षण किया गया जहां 19 जुलाई को हेरोइन का लेन-देन हुआ था। मौके पर मौजूद सुखदीप सिंह उर्फ जैस गिल की पहचान की गई और उसकी तलाशी ली गई।
तलाशी में उसके पास से एक ओप्पो मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें वही सक्रिय मोबाइल नंबर पाया गया जिसका उल्लेख मनिन्दर सिंह ने अपने मुख्य सप्लायर के तौर पर किया था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड से भी इस संपर्क की पुष्टि हुई। सभी उपलब्ध साक्ष्यों एवं तकनीकी प्रमाणों के आधार पर सुखदीप सिंह उर्फ जैस गिल को एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।
एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने वीरवार को पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026 में बैकवर्ड लिंकेज के जरिए की गई यह कार्रवाई पिछले तीन वर्षों में सबसे उत्कृष्ट रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष अब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल सहित विभिन्न राज्यों से कुल 59 मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 75 अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है।
तुलनात्मक आंकड़ों को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इसी समान अवधि में केवल सात मुख्य सप्लायर गिरफ्तार हुए थे और चार नेटवर्क तोड़े गए थे, जबकि वर्ष 2024 की समान अवधि में सात मुख्य सप्लायरों की गिरफ्तारी के साथ केवल दो नेटवर्क ध्वस्त किए जा सके थे।


















