Himachal Smart Meter Boycott: हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के बिल अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं। इससे लोगों में गुस्सा और परेशानी बढ़ती जा रही है। कई जिलों में उपभोक्ता शिकायत कर रहे हैं कि उनका बिल पहले से कई गुना अधिक आ रहा है। अब तो लोग स्मार्ट मीटर लगवाने से ही मना करने लगे हैं। आए दिन कहीं न कहीं से बिजली के बिलों के बढ़ने कि खबरें न्यूज़ पेपर और सोशल मीडिया की सुर्ख़ियों में रहती है।
ऐसी ही एक खबर सोलन जिले के जौणाजी से भी वायरल हो रही है। जहां ‘सरकार आपके द्वार’ कार्यक्रम चल रहा था। इस दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा फूट पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल के सामने उसने अपनी तकलीफ बताई। उसका कहना था कि घर में बिजली तो कट ही गई है, फिर भी बिजली बोर्ड ने उसे 12,000 रुपये का एक बिल और 4,500 रुपये का दूसरा बिल थमा दिया।
यह व्यक्ति दिलीप है, जो अब सिरमौर में रहता है। उसने बताया कि पहले उसका बिल सिर्फ 300 रुपये के आसपास आता था। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद यह मुसीबत बन गया। उसका पूरा सालाना खर्च ही महज 15,000 रुपये है। इतने भारी बिल की भरपाई वह कैसे कर सकता है?
दिलीप बहुत गुस्से और मायूसी में बोला, “मैंने बार-बार बिजली दफ्तर के चक्कर काटे, लेकिन किसी ने मेरी नहीं सुनी। अब मुझे न बिजली चाहिए और न ही मेरी जमीन पर खड़ा वह खंभा, जो कभी हादसा कर सकता है।” फिर उसने मंत्री से कहा, “बिजली बोर्ड अपना स्मार्ट मीटर और खंभा उखाड़ ले जाए। मैं 50 साल पहले की तरह दीया जलाकर रह लूंगा।”
यह सुनकर मौके पर मौजूद लोग हैरान रह गए। बिजली बोर्ड के अधिकारी राहुल वर्मा ने कहा कि यह मामला अब उनके ध्यान में आया है। उन्होंने वादा किया कि बिल की पूरी जांच होगी और 4 मार्च को जगह का निरीक्षण करके समस्या सुलझाई जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने भी अधिकारियों को फौरन कार्रवाई करने के आदेश दिए। बता दें कि कि गांवों में खासकर वृद्धजन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग बढ़े हुए बिजली बिलों के कारण काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था को पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन अनेक स्थानों पर यही प्रणाली लोगों के लिए असुविधा और चिंता का कारण बनती नजर आ रही है।















