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MS Dhoni से छीनी गई कप्तानी? 9 साल बाद पूर्व सेलेक्टर ने खोली पुरानी कहानी

BCCI Asked MS Dhoni: पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे ने 'द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो' में खुलासा किया कि जनवरी 2017 में एमएसके प्रसाद और उन्होंने एमएस धोनी से वनडे-टी20 कप्तानी छोड़ने की बात की। धोनी ने
MS Dhoni से छीनी गई कप्तानी? 9 साल बाद पूर्व सेलेक्टर ने खोली पुरानी कहानी
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MS Dhoni Resignation 2017 Secret: भारतीय क्रिकेट के महान कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी छोड़ने को लेकर पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे ने ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो’ में खुलासा किया कि जनवरी 2017 में एमएसके प्रसाद और उन्होंने एमएस धोनी से वनडे-टी20 कप्तानी छोड़ने की बात की। धोनी ने सहजता से स्वीकार किया और उसी रात ईमेल से लिखित में कप्तानी छोड़ने की इच्छा जताई।

खबरों के मुताबिक BCCI का मानना था कि यह फैसला विराट कोहली को तैयार करने के लिए जरूरी था। बता दें कि जनवरी 2017 में धोनी ने अचानक वनडे और टी20 की कप्तानी छोड़ दी थी। उस समय काफी आलोचना हुई थी, लेकिन अब पूर्व चयनकर्ता जतिन परांजपे ने ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो’ में पूरी घटना बताई है।

परांजपे ने बताया कि वे और उस समय के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद धोनी से बात करने के लिए तैयार होकर गए थे। धोनी नेट प्रैक्टिस में बल्लेबाजी कर रहे थे। उन्होंने एक घंटे तक बल्ला चलाया। फिर दोनों ने सम्मान से धोनी के पास जाकर कहा, “माही, हमें लगता है कि अब आगे बढ़ने का सही समय है।”

धोनी ने यह सुनकर कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं दिखाई। उन्होंने एमएसके प्रसाद से कहा, “अन्ना, यह बिल्कुल सही फैसला है। बताइए, आप मुझसे क्या चाहते हैं?” तब एमएसके ने कहा कि आपको लिखित में देना होगा कि आप कप्तानी छोड़ने के लिए तैयार हैं। धोनी ने फौरन हामी भर दी और कहा, “ठीक है, मैं यह कर दूंगा।”

उसी दिन देर रात चयनकर्ताओं को धोनी का आधिकारिक ईमेल मिला, जिसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि वे कप्तानी से हटना चाहते हैं। धोनी ने यह भी कहा कि वे नए कप्तान विराट कोहली की पूरी मदद करेंगे। उन्होंने विराट को अपना भाई बताया और कहा कि वे अपनी सारी अनुभव वाली बातें उन्हें देंगे।

यह फैसला टीम के भविष्य के लिए लिया गया था। विराट कोहली पहले से टेस्ट कप्तान थे, और अब उन्हें वनडे-टी20 की जिम्मेदारी भी मिल गई। धोनी एक सीनियर खिलाड़ी और मार्गदर्शक की भूमिका में 2019 विश्व कप तक टीम के साथ बने रहे।

उस समय इस फैसले पर काफी बहस हुई थी, लेकिन परांजपे ने कहा कि ऐसे मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं। धोनी ने बिना किसी विवाद के यह जिम्मेदारी निभाई और टीम को नई दिशा दी। यह घटना दिखाती है कि धोनी ने टीम के हित को हमेशा पहले रखा।

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