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Russia Crude Oil: रूसी सस्ते तेल से भारत को सवा लाख करोड़ की बचत, लेकिन अब इस वजह से मंडराया खतरा

Russia Crude Oil Crude Oil Prices: तेल की कीमतों में लगातार बढ़त: यूएस फेड ने की 50 बीपीएस की दर कटौती
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Russia Crude Oil:  भारत ने पिछले तीन साल में रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर करीब 15 अरब डॉलर (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये) की भारी बचत की है। यह राशि इतनी बड़ी है कि इससे भारत की इस साल की यूरिया सब्सिडी पूरी की जा सकती है।

बिजनेस-स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक भारत की सबसे अधिक बचत 2023 में हुई, जब G7 देशों ने रूस पर प्राइस कैप लगाया था, जिसके चलते रूसी तेल भारत को 5 से 20 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिला। हालांकि, अब यह छूट घटकर मात्र 1 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, जिससे जनवरी-जून 2025 में बचत केवल 0.8 अरब डॉलर रही।

इसके चलते भारत को अब महंगा तेल खरीदने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अगर रूस से तेल आपूर्ति कम हुई, तो भारत को इराक, सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका जैसे देशों से तेल खरीदना होगा, जो रूसी तेल जितना सस्ता नहीं होगा।

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विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी और अमेरिकी तेल की ऊंची कीमतों से रिफाइनिंग का मुनाफा 2 से 3 डॉलर प्रति बैरल तक कम हो सकता है। सऊदी अरब ने सितंबर के लिए अपने अरब लाइट तेल की कीमत में 3.2 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी कर दी है। अगर रूसी तेल की आपूर्ति पूरी तरह बंद हुई, तो कीमतें और चढ़ सकती हैं।

Russia Crude Oil: से कंपनियों ने कमाया मुनाफा 

उल्लेखनीय है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी जैसी रिफाइनरी कंपनियों, जो रूसी सस्ते तेल पर निर्भर थी, को अब मुनाफे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। सरकारी रिफाइनरियों ने इस साल रूसी तेल पर निर्भरता 10% कम कर दी है।

उदाहरण के लिए, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जुलाई में रूसी तेल की खरीद काफी घटा दी। केप्लर की विश्लेषक अमीना बक्र के अनुसार, रूसी तेल को खाड़ी देशों के तेल से पूरी तरह बदलना आसान नहीं है, क्योंकि इराक और कजाकिस्तान जैसे देश उत्पादन में कटौती कर रहे हैं।

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इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और कंपनियां वैकल्पिक उपायों पर काम कर रही हैं, लेकिन महंगे तेल की चुनौती भारत की इस बड़ी बचत को खतरे में डाल सकती है।

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