Sikkim Sundari: पूर्वी हिमालय की ठंडी और तेज हवाओं वाली ऊंची जगहों पर एक ऐसा दुर्लभ पौधा उगता है, जो लगभग जादुई सा लगता है। स्थानीय लोग इसे सिक्किम सुंदरी कहते हैं, जबकि वैज्ञानिक नाम र्यूम नोबाइल है। यह सिक्किम का छिपा हुआ खजाना है, जो ऊंचाई पर चढ़ने वाले यात्रियों के लिए एक खास तोहफा जैसा है। हाल ही में एक पर्यटक रतन सिंह सोनल द्वारा बनाया गया सिक्किम सुंदरी का वीडियो पोस्ट करते हुए मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने अपनी एक पोस्ट में इसे “धैर्य की मास्टरक्लास” बताया है।
दरअसल पूर्वी हिमालय की बर्फीली चोटियों और तेज हवाओं के बीच यह पौधा 4,000 से 4,800 मीटर की ऊंचाई पर पनपता है और इसे “ग्लासहाउस प्लांट” कहते हैं। पहली नजर में यकीन करना मुश्किल हो जाता है, कि यह कोई आम पौधा नहीं, बल्कि प्रकृति का एक धैर्यपूर्ण चमत्कार है। इसकी पारदर्शी पत्तियां प्राकृतिक ग्रीनहाउस की तरह काम करती हैं, जो ठंडी हवाओं और तेज यूवी किरणों से अंदर के नाजुक फूलों की रक्षा करती हैं। हिमालय के सूने परिदृश्य में यह चमकदार टावर जैसा दिखता है, मानो बर्फ और चट्टानों के बीच से रोशनी निकल रही हो।
I knew nothing about this extraordinary marvel: the ‘Sikkim Sundari’
Thriving at staggering altitudes of 4,000–4,800 meters, this “Glasshouse Plant” stands like a glowing tower against the mountains.
Its life is a masterclass in patience.
It is monocarpic, which means that… pic.twitter.com/keoMSmGcUl
— anand mahindra (@anandmahindra) December 21, 2025
सिक्किम सुंदरी का जीवन चक्र सबसे खास है। यह मोनोकार्पिक पौधा है, यानी जीवन में सिर्फ एक बार फूल खिलाता है। 7 से 30 साल तक यह जमीन के करीब छोटी पत्तियों के रूप में रहता है, कठिन पहाड़ी हालात में धीरे-धीरे ऊर्जा इकट्ठा करता है। फिर एक आखिरी जोरदार प्रयास में दो मीटर तक लंबा हो जाता है, पगोडा आकार का फूल खिलाता है, बीज बिखेरता है और मर जाता है। कोई पौधा इतने लंबे इंतजार के बाद इतनी शानदार चमक नहीं दिखाता।
यह पौधा उत्तर सिक्किम के ऊंचे ट्रेकिंग रास्तों, अल्पाइन दर्रों और हिमनदी घाटियों में मिलता है। इसकी दर्शन दुर्लभ और मौसमी होते हैं, जो प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए और भी रोमांचक बनाते हैं। स्थानीय लोग इसकी सुंदरता और मजबूती की तारीफ करते हैं। पारंपरिक ज्ञान में इसका दवाई के रूप में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इसे सख्ती से संरक्षित किया जाता है और सिर्फ दूर से देखा जाता है। इसकी पतली पत्तियां हवा में सरसराती हैं, जैसे कोई संगीत बज रहा हो।
आनंद महिंद्रा की पोस्ट ने सवाल उठाया कि हम दूर के महाद्वीपों की विदेशी वनस्पतियों के बारे में क्यों ज्यादा जानते हैं, जबकि अपने घर के पास ही ऐसी अद्भुत चीजें हैं? सिक्किम में इको-टूरिज्म और संरक्षण जागरूकता बढ़ने से यह पौधा अब धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रहा है। सिक्किम सुंदरी न सिर्फ देखने का सौभाग्य है, बल्कि हिमालयी पर्यावरण की नाजुकता की याद भी दिलाती है।
जानिए क्या है हिमालय की छुपी विरासत, ‘सिक्किम सुंदरी’? जिसका ज़िक्र किताबों में भी नहींhttps://t.co/2c1C4sd6vf pic.twitter.com/FtuP1c4VyJ
— Prajasatta (@prajasattanews) January 12, 2026
स्थानीय लोगों ने इसे यह नाम यूं ही नहीं दिया। ऊंचे पहाड़ों के बीच जब यह पौधा खड़ा होता है, तो सच में किसी सुंदर मीनार जैसा लगता है। इसकी मौजूदगी आसपास की चट्टानों और बर्फ के बीच एक अलग ही चमक पैदा करती है। जब यह पौधा पूरी तरह खिला होता है, तो दूर से ऐसा लगता है मानो पहाड़ों के बीच कोई चमकता हुआ स्तंभ खड़ा हो। यही वजह है कि ट्रेकिंग करने वाले लोग इसे देखकर ठहर जाते हैं।
वैज्ञानिक इसे एक बेहद अनोखी प्रजाति मानते हैं। यह उन पौधों में से है, जो बेहद सीमित इलाकों में ही उगते हैं। इसकी बनावट और जीवन चक्र इसे बाकी पौधों से अलग बनाता है। इतनी ऊंचाई पर जीवन आसान नहीं होता। जमीन सख्त होती है, तापमान अक्सर शून्य से नीचे चला जाता है और हवा लगातार चलती रहती है। फिर भी सिक्किम सुंदरी इन हालातों में खुद को ढाल लेती है।
यह पौधा तेज अल्ट्रावायलेट किरणों और ठंडी हवाओं से खुद को बचाने का तरीका जानता है। यही वजह है कि यह वर्षों तक बिना किसी शिकायत के जीवित रहता है। इसके ऊपरी हिस्से में पतले, हल्के और पारदर्शी पत्ते होते हैं, जिन्हें ब्रैक्ट्स कहा जाता है। ये पत्ते सूरज की रोशनी को अंदर रोकते हैं। ये ब्रैक्ट्स अंदर गर्मी को कैद कर लेते हैं, जिससे फूल ठंड से सुरक्षित रहते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी कांच के कमरे में पौधे को रखा गया हो।
सिक्किम सुंदरी सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि धैर्य, संघर्ष और प्रकृति की ताकत का प्रतीक है। यह हमें सिखाती है कि कभी-कभी सबसे सुंदर चीज़ें चुपचाप, बिना शोर के, अपने समय का इंतजार करती हैं।

















