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आखिर इंसान क्यों ऐसी गलती कर बैठता है?

आखिर इंसान क्यों ऐसी गलती कर बैठता है?

राजेश सारस्वत|
क्या आपने कभी किसी जानवर को, किसी पक्षी को,किसी पशु को जानबूझकर आग में जाते हुए देखा है?नहीं।कभी पानी में डूबकर आत्महत्या करते देखा है?नहीं।आखिर इंसान क्यों ऐसी गलती कर बैठता है? इस खूबसूरत कायनात में खुदा ने इंसान एक नायाब चीज बनाई है जिसे हरबात को समझने जानने के लिए बुद्धि, विवेक दिया है। यही इंसान दुनिया में राज करता है, यही इंसान आज पृथ्वी से अंतरिक्ष तक पहुंच गया है। जाने किस- किस तरह के आविष्कार इस मानव ने कर दिए है।

बच्चों से लेकर वृद्ध तक सभी अपनी – अपनी बुद्धि व शारीरिक सामर्थ्य के अनुसार अनेक प्रकार के चमत्कार दुनिया को दिखाते आये है। उतर प्रदेश की अरुणिमा सिन्हा जिसने विकलांग होने के बावजूद भी एवरेस्ट पर जाकर फतह हासिल की। निक वुजिकिक जिसके न दोनों पांव न दोनों हाथ थे फिर भी दुनिया में मोटिवेशन स्पीकर के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की। न जाने विवेकी इंसान को तब क्या हो जाता जब वह आत्म हत्या के लिए प्रयत्न करता है। ऐसे-ऐसे व्यक्ति जो दूसरों के लिए आदर्श बने, बड़े-बड़े पदों पर विराजमान रहे लेकिन अंततः आत्महत्या कर गए।

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पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के रहने वाले पूर्व डी जी पी अश्वनी कुमार जी का फंदे से लटका शव हाल ही में मंडी के सांसद राम स्वरूप जी का फंदे से लटका शव गहरी चिंता का विषय है। आत्महत्या के लिए वही इंसान प्रेरित हो सकता है जो भीतर से बिल्कुल टूट चुका हो। अगर ऐसे व्यक्ति मनोबल हारकर आत्महत्या कर सकते हैं तो इसके पीछे कोई गहरे राज हो सकते हैं जिसकी छानबीन होना बहुत आवश्यक है लेकिन अश्वनी कुमार जी का मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया और लगता है कि सांसद राम स्वरूप जी का मामला भी उसी बस्ते में जाने वाला है जो कि आने वाली नस्लों के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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भगवत गीता में भी कहा गया है कि यद् यद् आचरति श्रेष्ठः तद् तदेव इतरो जनाः अर्थात् जैसा आचरण बड़े लोग जिनका मान पद बड़ा होता है करते हैं जनता भी उनको देखकर व्यवहार करती है। भारत वर्ष में रहने वाले व्यक्ति तो हमेशा ज्ञान -ध्यान, श्रद्धा-भक्ति से प्रेरित होते हैं जो प्रत्येक कर्म को सूझबूझ कर करते हैं। हमारे उपनिषदों में भी वर्णन आता है कि अंधस्तम:प्रविशन्ति ये आत्मघातिनो जना:। इसलिए हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अरुणिमा सिन्हा व निक की तरह हार न मानकर बेहतर जीवन यापन करने का प्रयास करना चाहिए न कि किसी दर्द की घुटन में दबकर आत्महत्या जैसे कृत्य को अंजाम देना चाहिए।

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सरकार को भी चाहिए कि जिन व्यक्तियों ने जिस भी परिस्थिति में आत्महत्या की है उसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और जो कोई ऐसा कारण रहा जिससे इंसान आत्महत्या करने को मजबूर हुआ हो उसका उचित समाधान निकाल कर ऐसे कार्य को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए।

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